इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी निर्वाचन याचिका में ठोस साक्ष्य, स्पष्ट विवरण और सारवान तथ्यों का अभाव हो तो उसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जा सकता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने बदायूं की मुडिया धुरेकी नगर पंचायत के चेयरमैन पद के चुनाव से जुड़ी याचिका निरस्त करने के जिला न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने दिया है।
बदायूं में 2023 को नगर पंचायत चुनाव हुआ था। इसमें अनुपम पाठक पांच वोटों से विजयी हुए थे। दूसरे स्थान पर रहे दिनेश चंद्र उर्फ दिनेश चंद्र भट्ट ने निर्वाचन अधिकरण, बदायूं के समक्ष याचिका दायर कर चुनाव प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाए थे। याचिकाकर्ता ने वोटर लिस्ट में करीब 250 बाहरी लोगों के नाम जुड़वाने, विजयी उम्मीदवार व परिजनों के नाम दो स्थानों पर दर्ज होने और मतगणना के दौरान ओवर-राइटिंग कर वोटों में हेराफेरी करने का आरोप लगाया था। अधिकरण से राहत न मिलने पर याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सामान्य आरोप पर्याप्त नहीं हैं। जिन मतदाताओं पर आपत्ति है, उनके नाम, संख्या और ठोस विवरण देना आवश्यक था। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन याचिका गंभीर प्रक्रिया है, जिसे तंग करने के उद्देश्य से दायर नहीं किया जा सकता।