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High Court : परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती, अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को लचीला बनाएं

Thu, 22 Jan 2026 07:12 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य अचानक आए आर्थिक संकट से परिवार को उबारना है। परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य अचानक आए आर्थिक संकट से परिवार को उबारना है। परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती है। भर्ती नियमों की कठोरता को इसके उद्देश्यों को विफल करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अनुकंपा नियुक्ति में आयु सीमा की बाधा को दूरे करें और नियमों को लचीला बनाएं।

यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की अनुकंपा नियुक्ति समिति को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता की आयु में छूट के अनुरोध पर एक महीने के भीतर विचार करे। प्रतिवादी/याची एन.शांगबनाबी देवी की बहन की 2015 में बीएचयू में सेवा के दौरान मौत हो गई थी।

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उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, जिसे विवि ने खारिज कर दिया। कहा कि उनकी आयु घटना के समय 37 वर्ष थी, जो ओबीसी श्रेणी के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा (33 वर्ष) से अधिक थी। इसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी तो एकल पीठ ने उनके पक्ष में आदेश दिया। इस पर बीएचयू ने एकल पीठ के पांच फरवरी 2025 के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर की।

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बीएचयू की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कार्यकारी परिषद ने केवल विधवाओं या तलाकशुदा महिलाओं को आयु में छूट देने का प्रस्ताव पारित किया है। कहा कि जब तक मूल अनुकंपा नियमों में संशोधन नहीं होता, तब तक ऐसे प्रशासनिक प्रस्ताव किसी अन्य आश्रित (जैसे बहन) के अधिकार को कम नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि परिवार वास्तव में आर्थिक तंगी में है तो केवल अधिक आयु के आधार पर उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। मुकदमेबाजी के दौरान हुई देरी को भी नजरअंदाज करने भी निर्देश दिया है।

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