Allhabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजीपी से पूछा है कि 37 साल पहले जिला जज को थाने में घसीटने की धमकी देने वाले ललितपुर के तत्कालीन एसपी जिंदा हैं या नहीं...व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर डीजीपी बताएं कि वह अभी कहां हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजीपी से पूछा है कि 37 साल पहले जिला जज को थाने में घसीटने की धमकी देने वाले ललितपुर के तत्कालीन एसपी जिंदा हैं या नहीं...व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर डीजीपी बताएं कि वह अभी कहां हैं। सेवानिवृत हैं या पेंशनभोगी, जज की संस्तुति के अनुपालन में उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। मामले की सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की अदालत ने हत्या के मामले में बृंदावन व अन्य की ओर से 1988 के दाखिल आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। करीब चार दशक बाद इस मुद्दे को पुनर्जीवित करते हुए कोर्ट ने कहा कि केवल समय बीत जाने से एसपी के गुंडे जैसे आचरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सत्र न्यायाधीश ने पाया था कि पुलिस अधीक्षक ने गुंडे की तरह व्यवहार किया और अदालत की मर्यादा को चुनौती दी थी।
कोर्ट ने 30 अप्रैल 1988 को सत्र न्यायाधीश एलएन राय की ओर से पारित निर्णय के प्रस्तर 190 व 191 का अवलोकन किया, जिसमें तत्कालीन एसपी बीके भोला के खिलाफ अत्यंत गंभीर और निंदनीय टिप्पणियां दर्ज थीं। हाईकोर्ट ने आदेश में उस टिप्पणी को उद्धृत करते हुए कहा कि एसपी ने ट्रायल कोर्ट के जज को धमकी दी थी कि यदि उन्होंने पुलिस से रिकॉर्ड या वायरलेस संदेश तलब किए, या उन्हें बचाव पक्ष के गवाह के रूप में प्रस्तुत होने को कहा तो उन्हें थाने में घसीटकर ले जाया जाएगा।