इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवेचना अधिकारियों की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए पक्षकार से रुपये मांगे जाने की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई है। साथ ही प्रदेश के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वह इस आशय का परिपत्र जारी करें कि कोई भी पुलिस अधिकारी हलफनामा दाखिल करने के लिए रुपये की मांग न करें। फतेहपुर निवासी कमलेश कुमार मिश्र व अन्य के मामले में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने जांच अधिकारी मधुसूदन वर्मा के खिलाफ डीजीपी को मामला भेजा है।
याची के वकील ने बताया कि जांच अधिकारी ने पक्षकार को फोन किया और जवाबी हलफनामा दाखिल करने के एवज में तीन हजार रुपये की मांग की। आरोप है कि जांच अधिकारी पक्षकार को फोन कर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए पैसे मांगते हैं। अदालत में मौजूद विवेचनाधिकारी ने माना कि उन्होंने जानकारी के लिए पक्षकार को फोन किया था। रुपये की मांग नहीं की थी। याची ने पुलिस विभाग की छवि खराब करने के लिए झूठे आरोप लगाए हैं। कोर्ट ने विवेचना अधिकारी के खिलाफ जांच का निर्देश देते हुए अगली तिथि 23 जुलाई नियत की है।