इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी हाथ से बनाकर देने पर नाराजगी जताई है। कहा, आश्वासन के बावजूद हाथ की बनी कॉपी अदालत मेें दाखिल की जा रही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी हाथ से बनाकर देने पर नाराजगी जताई है। कहा, आश्वासन के बावजूद हाथ की बनी कॉपी अदालत मेें दाखिल की जा रही है। इस पर महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को मेडिकल-पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी कंप्यूटर से तैयार कराने का आदेश दिया है।
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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की अदालत ने पीलीभीत के करेली में दुष्कर्म के नाबालिग आरोपी की जमानत मंजूर करते हुए की। कोर्ट ने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को मेडिकल जांच व पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी कंप्यूटर से तैयार कराने का आदेश दिया है। कहा है कि मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी तैयार कराने की जवाबदेही डॉक्टर, स्टाफ के अलावा सीएमओ व सीएमएस की भी है। कोर्ट ने महानिदेशक को इस नियम को पूरे प्रदेश में कड़ाई से लागू करने का एक और मौका दिया है।
इससे पहले कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी व डायरेक्टर जनरल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया। कहा, आश्वासन के बावजूद मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कंप्यूटर से तैयार नहीं कराई जा रही है। इस पर तीनों ने बिना शर्त माफी मांगी। वहीं, उन्होंने बताया कि सर्कुलर जारी किया जा चुका है।
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लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ नोटिस जारी किया गया है। इसके लिए सॉफ्टवेयर बनाने की तैयारी प्रगति पर है। डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा, अस्पतालों पर महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य का नियंत्रण है। इसके जवाब में महानिदेशक ने बताया कि पीलीभीत के सीएमओ की ओर से डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।