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High Court : महाधिवक्ता कार्यालय की कार्यप्रणाली से कोर्ट खफा, पूछा- कर्मचारियों की कमी क्यों

Sun, 05 Apr 2026 03:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय की लचर कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की भारी कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा है कि सरकारी वकीलों को समय पर निर्देश न मिलना अव्यवस्था और सीधे तौर पर न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप के समान है।
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अदालत का आदेश - फोटो : istock
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय की लचर कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की भारी कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा है कि सरकारी वकीलों को समय पर निर्देश न मिलना अव्यवस्था और सीधे तौर पर न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप के समान है।

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यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने सूबेदार यादव की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। मामले में मांगी गई जानकारी मिलने में देरी से नाराज कोर्ट ने कहा कि सरकारी पक्ष से अदालत को उचित सहायता नहीं मिलने के कारण मुकदमों के निस्तारण में अनावश्यक देरी हो रही है।

मामला उत्तर प्रदेश लघु खनिज (रियायत) नियमावली के तहत बिना कारण बताओ नोटिस के की गई रिकवरी से जुड़ा था। कोर्ट ने सरकारी वकील से जवाब मांगा था, लेकिन तीन तारीखें बीतने के बाद भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल सके। एक स्तर पर तो वकील ने यह तक कह दिया कि निर्देश व्हाट्सएप पर मिल गए हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण वे समय पर प्रिंट नहीं हो पाए। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारी सरकारी वकीलों के अनुस्मारकों का जवाब तक नहीं दे रहे हैं।
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अधीनस्थ सेवा चयन आयोग बताए कब होगी भर्ती

स्टाफ की कमी की दलील ओर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ को पक्षकार बनाते हुए आयोग से पूछा है कि महाधिवक्ता कार्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती के लिए विज्ञापन कब होगा, मौजूदा स्थिति क्या है। अब मामले की सुनवाई 17 अप्रैल को होगी।

महाधिवक्ता की अनुपस्थिति पर नाराजगी

महाधिवक्ता की अनुपस्थिति पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। कहा कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक सवालों पर जवाब देने के लिए न तो महाधिवक्ता और न ही कोई अतिरिक्त महाधिवक्ता कोर्ट में मौजूद थे।

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