इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के नगर आयुक्त के ध्वस्तीकरण आदेश को महापौर के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त के स्थगित करने पर आश्चर्य जताया है। रंजन केसरवानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नीरज तिवारी, न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त को व्यक्तिगत हलफनामे संग कोर्ट में बुधवार दोपहर दो बजे पेश होने का आदेश दिया है।
नगर आयुक्त से केपी कक्कड़ रोड स्थित जर्जर मकान ध्वस्त करने की मांग की गई थी। उसमें तिथि निर्धारित कर पुलिस बल व मजिस्ट्रेट की तैनाती करने की भी मांग उठाई थी। 31 अगस्त 2021 को नगर आयुक्त ने उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा-331 के तहत मकान को अत्यंत जर्जर घोषित कर ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 13 जून 2023 को अपर नगर आयुक्त ने महापौर के निर्देशों के अनुपालन में नगर आयुक्त के पूर्व आदेश को स्थगित कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि जब अगस्त 2021 में भवन अत्यंत जर्जर पाया गया था तो जून 2023 में बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञ की नई रिपोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश को कैसे स्थगित किया जा सकता है। कोर्ट ने मामले में नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आदेश में दर्ज तथ्यों के संबंध में शपथपत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।