इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन लोगों की हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए दोषियों की अपील को खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने महेश्चरी प्रसाद और अन्य की अपील पर दिया है।
हमीरपुर जिले के मुस्करा थाना क्षेत्र में अक्तूबर 2005 की मध्यरात्रि को एक ही परिवार के तीन सदस्यों विश्वनाथ, उनकी पत्नी नीलीबाई उर्फ राज कुमारी और उनके बेटे महेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के मुख्य आरोपी महेश्वरी प्रसाद का पीड़ित विश्वनाथ से संपत्ति और अन्य वजहों को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। आरोप है कि महेश्वरी प्रसाद और अन्य ने मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था।
ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। याची अधिवक्ता की ओर से दलील दी गई कि चश्मदीद गवाह वादी और मृतक परिवार के रिश्तेदार हैं। ऐसे में उनकी गवाही को सच नहीं मानी जा सकती।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने बाद याची की दलील को मानने से इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल रिश्तेदार होने के आधार पर किसी गवाह को अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता, यदि उनकी गवाही विश्वसनीय और तर्कसंगत हो। कोर्ट ने पाया कि इन गवाहों के बयान घटनाक्रम से पूरी तरह मेल खाते हैं और वे पूरी तरह भरोसेमंद हैं।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किए गए अवैध देशी तमंचे और कारतूस बरामद किए थे। एफएसएल की रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि घटनास्थल से बरामद खोखे उन्हीं हथियारों से चलाए गए थे जो आरोपियों से जब्त किए गए थे। यह तकनीकी साक्ष्य मामले में ठोस कड़ी साबित हुआ। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के सुनाए गए दोषसिद्धि और सजा के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।