इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच के बाद यदि केवल गैर-संज्ञेय अपराधों में चार्जशीट दाखिल की जाती है तो उसे शिकायत (परिवाद) के रूप में माना जाएगा। साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन आदेश को रद्द कर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच के बाद यदि केवल गैर-संज्ञेय अपराधों में चार्जशीट दाखिल की जाती है तो उसे शिकायत (परिवाद) के रूप में माना जाएगा। साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन आदेश को रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की एकल पीठ ने अमरोहा के हसनपुर क्षेत्र के वसीम की ओर से दाखिल अर्जी पर दिया है।
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मामले में हसनपुर थाने में दर्ज एफआईआर की विवेचना के बाद पुलिस ने 24 मार्च 2026 को जान से मारने की धमकी के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 11 मई 2026 के संज्ञान और समन आदेश जारी किया था। याची ने इसे रद्द करने की मांग में हाईकोर्ट में अर्जी दायर की। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों धाराएं गैर-संज्ञेय अपराधों से संबंधित हैं। ऐसी पुलिस रिपोर्ट को शिकायत माना जाएगा और रिपोर्ट दाखिल करने वाला पुलिस अधिकारी शिकायतकर्ता माना जाएगा।