वहीं, सचिव विक्रांत पांडेय ने कार्यालय अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई व कारण बताओ नोटिस को मनमाना बताया। कहा कि 25 लाख की वित्तीय अनियमितता की जानकारी होने पर 10 मई 24 को पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश खरे, संयुक्त सचिव प्रशासन सुमित श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष रणविजय सिंह, कार्यकारिणी सदस्य दिनेश यादव व सर्वेश्वर लाल श्रीवास्तव शामिल थे। लेकिन,उसी दिन अध्यक्ष ने कमेटी को भंग कर दिया था। अब यह जांच और कारण बताओ नाेटिस औचित्यहीन है।
आरोप बेबुनियाद हैं: पवन पांडेय
नौ करोड़ के गबन मामले में पवन ने कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं। मुझे आंतरिक राजनीति का शिकार बनाया जा रहा है। जो रुपये बार की तिजोरी से गायब हुए, उसकी सूचना उन्होंने खुद अध्यक्ष को दी थी। सीसीटीवी कैमरे खराब होने की जानकारी भी दी थी। कारण बताओ नोटिस का विस्तृत जवाब शनिवार को दूंगा।