टैटू हटाने के बाद किया आवेदन, लेकिन नहीं हुआ विचार
बाद में उम्मीदवारों ने टैटू हटकार एसएसबी के समक्ष अभ्यावेदन दिया लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। अभ्यर्थियों ने मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं के वकील का तर्क था कि याचिकाकर्ताओं ने अभ्यावेदन के जरिए आग्रह किया था कि यदि उन्हें एक अवसर प्रदान किया जाता है तो वे टैटू हटा देंगे और उसके बाद याचिकाकर्ताओं का चिकित्सकीय परीक्षण फिर से किया जा सकता है।
इसके जवाब में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल का कहना था कि जहां तक टैटू हटाने का संबंध है, प्रतिवादी उच्च न्यायालय के डिवीजन बेंच के फैसले से बाध्य होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि दो याचियों को मायोपिया और व्यापक टेनिया वर्सिकलर भी था। उन्हें तभी समायोजित किया जा सकता है, जब वे इस रोग से मुक्त हों।
कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं के टैटू हटा दिए जाते हैं तो उस विशेष विकलांगता को मंत्री पदों पर चयन के लिए बाधा नहीं माना जा सकता है, जिसके लिए याचिकाकर्ताओं ने आवेदन किया है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर दो याजियों में कोई विकलांगता थी जो प्रतिवादियों के अनुसार प्रकृति में स्थायी थी तो उन पर विचार नहीं किया जा सकता है।