याची का कहना है कि प्रेम सिंह ने याची के भाई पर जानलेवा हमला किया। याची की मां पुलिस थाने में शिकायत लेकर गइ लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उल्टे याची का चालान कर दिया गया। मां माया देवी ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के निर्देश पर हाईवे थाना मथुरा में प्राथमिकी दर्ज की गई। इससे नाराज पुलिस ने याची की मां के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इसकी शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को की गई।
आयोग के आदेश पर एसएचओ हाईवे सुरेंद्र सिंह यादव व दरोगा नेत्रपाल सिंह के खिलाफ 10अगस्त 2016 को धारा 166 ए में केस दर्ज हुआ। इसके बाद एसओजी ने 12 जनवरी 18 को उसके भाई पुनीत कुमार व याची व ऑटो ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया, जिसकी शिकायत अनुसूचित जाति जनजाति आयोग से की गई। आयोग के निर्देश पर लखनऊ मुख्यालय के एएसपी की विशेष जांच बिठाई गई। रिपोर्ट में 35 पुलिस कर्मचारियों को झूठे केस दर्ज कर झूठे साक्ष्य गढ़ने का दोषी करार दिया।
जब पुलिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो याची ने शिकायत की। इसके बाद फिरोजाबाद में अपहरण का केस दर्ज कराया गया। शिकायत वापस लेने का पुलिस ने दबाव बनाया। फिर शिकायत पर आईजी आगरा रेंज ने केस आगरा स्थानांतरित कर दिया। आगरा पुलिस ने याची के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की। इस पर यह याचिका दायर की गई है।