इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नौकरी के बावजूद खुद को बेसहारा गृहणी बता भरण पोषण की मांग करने वाली पत्नी के खिलाफ पारिवारिक न्यायालय को झूठा हलफनामा देने पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। साथ ही भरण पोषण पर रोक लगा दी। यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने कन्नौज के मसरूफ अली की याचिका पर दिया है।
याची की पत्नी ने पारिवारिक न्यायालय में अपने व दो बच्चों के भरण पोषण की मांग कर अर्जी दाखिल की थी। इस पर पारिवारिक न्यायालय ने याची की पत्नी के पक्ष में 14 हजार रुपये प्रतिमाह भरण पोषण अदा करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अधिवक्ता सुनील चौधरी ने दलील दी कि याची की पत्नी टूंडला (फिरोजाबाद) के एफएच मेडिकल कॉलेज में नौकरी कर रही है। 70 हजार रुपये वेतन पा रही है। उसने अदालत में खुद को बेसहारा गृहणी बता झूठा हलफनामा दाखिल किया है। अदालत को गुमराह कर भरण पोषण पाने का आदेश हासिल किया है। कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय को याची की पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अर्जी पर छह हफ्ते में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है।