इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आय प्रमाणपत्र निरस्तीकरण के मामले में जिलाधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने हाथरस के जिलाधिकारी को गलत आधार पर आय जोड़ने के मामले में व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आय प्रमाणपत्र निरस्तीकरण के मामले में जिलाधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने हाथरस के जिलाधिकारी को गलत आधार पर आय जोड़ने के मामले में व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने हेमलता की याचिका पर दिया है।
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याची हेमलता के पति का आय प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया था। याची का कहना था कि उनके पति गरीबी रेखा (बीपीएल) के अंतर्गत आते हैं। इसके आधार पर उन्हें रोजगार प्राप्त हुआ था। हाथरस के जिलाधिकारी ने 29 दिसंबर 2025 को याची की आपत्ति खारिज करते हुए प्रमाणपत्र निरस्तीकरण को बरकरार रखा था। सुनवाई के दौरान अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि जिलाधिकारी के आदेश में त्रुटि है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आय निर्धारण में याची के ससुर की आय को भी जोड़ लिया गया, जो कि अप्रासंगिक था।
कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 के आदेश को रद्द करते हुए मामले को जिलाधिकारी हाथरस के पास पुनः विचार के लिए भेज दिया। निर्देश दिया कि सभी प्रासंगिक तथ्यों और नियमों के आधार पर नया आदेश पारित किया जाए। साथ ही 17 मार्च 2026 को पारित पूर्व आदेश के तहत जिलाधिकारी को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी। इससे पहले इसी मामले में न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव एवं न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की पीठ ने जिलाधिकारी के आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने आदेश को लापरवाहीपूर्ण और बिना ठोस आधार का बताते हुए डीएम को तलब किया था।