महिला ने इस संबंध में जिला जज मऊ से शिकायत की। रजिस्ट्रार जनरल, हाईकोर्ट ने इस मामले में जिला जज मऊ को जांच अधिकारी नियुक्त किया। महिला अपना बयान दर्ज कराने नहीं पहुंची। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें न्यायिक मजिस्ट्रेट को मुख्य आरोप से मुक्त कर दिया। साथ ही टिप्पणी की कि अज्ञात महिला से फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करना और उसके साथ कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाते हुए बातचीत करना। महिला के बैंक खाते में रुपये का भुगतान करना न्यायिक मानदंडों के खिलाफ है। रिपोर्ट के आधार पर रजिस्ट्रार जनरल ने 2018 से वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया। इसके विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध लगाए गए प्राथमिक आरोप सिद्ध नहीं हुए। जांच रिपोर्ट में दोषमुक्त करने का स्पष्ट उल्लेख है। ऐसे में जब तक कि शिकायतकर्ता उपस्थित होकर अपनी शिकायत को सिद्ध नहीं कर देती तब तक याची के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी करना उचित नहीं। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 13 मई 2022 का विवादित दंड आदेश को रद्द कर दिया।