वहीं, आयोग की ओर से अपर महाधिवक्ता ने दलील दी कि पेपर लीक में आयोग का ही एक संविदा कर्मचारी मुख्य रूप से शामिल था, जिसने कई अभ्यर्थियों से फोन पर बातचीत की थी। परीक्षा बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित थी, इसलिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि पेपर लीक का विस्तार कितना व्यापक था।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि 18 अप्रैल 2026 को होने वाली पुन: परीक्षा केवल उन पांच विषयों (उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और प्राणी विज्ञान) के लिए मान्य मानी जाएगी, जिनमें गड़बड़ी मिली है। शेष 28 विषयों (जैसे अंग्रेजी, गणित, रसायन विज्ञान, अर्थशास्त्र आदि) के लिए 16-17 अप्रैल 2025 को हुई मूल परीक्षा को ही वैध माना जाएगा। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह इन 28 विषयों की ओएमआर शीट का मूल्यांकन कर परिणाम घोषित करे और फिर सभी विषयों के सफल अभ्यर्थियों को एक साथ साक्षात्कार के लिए बुलाए।