इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर के आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक के बाद हुई मुठभेड़ पर बिसंडा थाने के प्रभारी को तलब किया है। पूछा है कि पुलिस ने किस दिव्य शक्ति से पता किया कि अज्ञात के खिलाफ दर्ज लूट की एफआईआर का आरोपी याची ही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर के आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक के बाद हुई मुठभेड़ पर बिसंडा थाने के प्रभारी को तलब किया है। पूछा है कि पुलिस ने किस दिव्य शक्ति से पता किया कि अज्ञात के खिलाफ दर्ज लूट की एफआईआर का आरोपी याची ही है।
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यह सवाल न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने आदेश पांडेय की याचिका पर किया है। मामला बांदा के बिसंडा थाना क्षेत्र का है। याची ने गैंगस्टर में दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए सरकार से जवाबी हलफनामा तलब कर याची की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। इसी दौरान नौ मई की रात याची को पुलिस ने लूट के एक मामले में मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार करने का दावा किया।
वहीं, याची का दावा है कि उसे पुलिस ने जबरन उठाया और गोली मार दी। शिकायत पर कोर्ट ने मुठभेड़ की जांच बांदा के जिला जज को सौंपते हुए रिपोर्ट तलब की। पेश जिला जज और डॉ.विनीत कुमार की मेडिकल जांच की रिपोर्ट में कोर्ट ने पाया कि याची के बाएं पैर की पिंडली पर गनशॉट एंट्री और एग्जिट के निशान पाए गए हैं। वहीं, सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याची की गिरफ्तारी लूट के मामले की गई है।
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इस पर कोर्ट ने पूछा कि एफआईआर में कोई नामजद नहीं था तो पुलिस किस दिव्य शक्ति से इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी आदेश पांडेय ही है? क्या गिरफ्तारी से पहले उसकी शिनाख्त परेड कराई गई थी? कोर्ट ने सरकार को तीन दिन में हलफनामे पर पूछे गए सवाल का जवाब देने का आदेश दिया है। साथ ही याची को स्वतंत्रता दी है कि वह लूट के मामले में जमानत याचिका दाखिल कर सकता है। इससे उसके फर्जी मुठभेड़ के दावे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अब मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।