हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में इस बार मतगणना मैन्युअल होगी। पिछले कई चुनावों से कंप्यूटर प्रणाली से चुनाव और मतगणना को लेकर उठने वाले सवालों के मद्देनजर एल्डर कमेटी ने यह निर्णय लिया है। एल्डर कमेटी के चेयरमैन वरिष्ठ अधिवक्ता वीसी मिश्र ने दावा किया है कि वह पूर्व की तुलना में कम खर्चे में साफ सुथरा चुनाव कराएंगे। इसके लिए एक कोर कमेटी गठित की जाएगी, जो चुनाव की सारी कार्यवाही पर नजर रखेगी।
वीसी मिश्र ने कहा कि पिछले चुनावों में देखा गया है कि बार चुनाव पर 20 लाख रुपये के करीब खर्च आता है। इसकी समीक्षा की तो लगा कि इससे काफी कम खर्च में चुनाव कराया जा सकता है। इससे बार का पैसा बचेगा। मतदान और मतगणना को लेकर हर चुनाव में धांधली के आरोप लगते रहे हैं। इसे देखते हुए इस बार मतगणना कंप्यूटर के बजाए मैन्युअली कराने का निर्णय लिया गया है। इसमें वक्त अधिक लगेगा मगर चुनाव साफ सुथरा होगा।
एल्डर कमेटी के चेयरमैन ने बताया कि इस बार मतदान को लेकर खास प्रबंध किए गए हैं। कुल 16 बूथ बनाए जाएंगे। इनमें से एक-एक बूथ सीनियर एडवोकेट और महिला एडवोकेट के लिए होंगे। शेष 14 बूथों पर जिसकी जहां मर्जी हो वोट दे सकता है। पिछली बार साढ़े सात हजार मतदाता थे, जिनकी संख्या इस बार 10 हजार पहुंच गई है। पूरी मतदाता सूची कंप्यूटराइज्ड होगी। ऐसा सॉफ्टवेयर डाला गया है कि एक मतदाता के वोट डालते ही सभी कंप्यूटरों पर इसकी जानकारी आ जाएगी और उसका वोट लॉक हो जाएगा। दुबारा मतदान नहीं पाएगा। जो ऐसा करने की कोशिश करेगा वह पकड़ा जाएगा और उसकी बार की सदस्यता रद्द होगी।
वीसी मिश्र ने चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को हाईकोर्ट परिसर और उसके आसपास से अपने पोस्टर, बैनर आदि प्रचार सामग्री हटाने के लिए कहा है। ऐसा नहीं करने पर प्रत्याशी का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा। इस बार मतदाता को अपना परिचयपत्र जमा करने की बाध्यता नहीं होगी। प्रत्याशियों से आग्रह किया गया है कि चुनावी पार्टियां न दें।
चुनाव पार्टियां रोकने की मांग
अधिवक्ता फोरम ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में चुनावी पार्टियों पर रोक लगाने की मांग की है। फोरम की एक बैठक में कहा गया कि चुनावी पार्टियों में प्रत्याशी काफी पैसे खर्च करते हैं, जो उचित नहीं है। इसके अलावा बैलेट पेपर पर प्रत्याशी का फोटो अनिवार्य रूप से लगाया जाए। इससे प्रत्याशियों की सही पहचान हो सकेगी। इसके चुनाव तिथि में संशोधन की मांग की गई है। मौनी अमावस्या स्नान पर्व चार फरवरी को पड़ने के कारण एक फरवरी को मतदान कराना उचित नहीं होगा। बैठक की अध्यक्षता राजेश खरे ने की। इसमें सत्यप्रकाश सिंह, सुनील सहगल, नागेंद्र कुमार त्रिपाठी, , कमलदेव पांडेय आदि ने अपने विचार रखे।