याची की ओर से पेश अधिवक्ता विक्रांत डबास, अधिवक्ता शाद खान व अधिवक्ता चंद्र प्रकाश सिंह ने दलील दी। कहा कि शाही हमाम की राष्ट्रीय महत्व की विरासत है। इसके विध्वंस के प्रयासों पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने एक साल पहले इस स्मारक का सर्वेक्षण किया था। इसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया था, लेकिन इसे अभी तक प्राचीन स्मारक, पुरातत्व स्थल व अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत आधिकारिक रूप से संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया गया है।
अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि स्मारक को बचाना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और सरकार का कर्तव्य है। कोर्ट ने सरकार से 27 जनवरी को मामले की विस्तृत जानकारी तलब की है। साथ ही आगरा सर्कल के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को हिदायत दी है कि अगली सुनवाई तक यह सुनिश्चित किया जाए कि हमाम के भवन व स्मारक को कोई क्षति न हो।