कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को अगली सुनवाई पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उन दिशानिर्देशों को प्रस्तुत करने कहा है जिनके तहत विदेशी कंपनी को विदेश में ऋण दिया जाता है और विदेशी नागरिक से गिरवी संपत्ति ली जाती है।
सुनवाई के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिवक्ता ने कोर्ट से समय मांगा। इसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई पर यह स्पष्ट करने को कहा कि दुबई स्थित गिरवी वेयरहाउस का मूल्यांकन क्या था और इसे किस कीमत पर बेचा गया। साथ ही बिक्री के बावजूद पूरा ऋण क्यों नहीं वसूला जा सका। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि वेयरहाउस का खरीदार कौन है। कोर्ट ने मामले को जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में दोपहर 2 बजे पुनः सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।