इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना मेडिकल डिग्री के अस्पताल संचालित करने और एक मरीज की सर्जरी में शामिल रहने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने सरफराज की अर्जी पर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना मेडिकल डिग्री के अस्पताल संचालित करने और एक मरीज की सर्जरी में शामिल रहने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने सरफराज की अर्जी पर दिया है।
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रामपुर जिले के सिविल लाइंस थाने में याची के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और फर्जी डॉक्टर बनकर इलाज करने के आरोप प्राथमिकी दर्ज है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है। मृतक का ऑपरेशन डॉ. अजय कुमार गौतम ने किया था और आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए।
राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपी और डॉक्टर दोनों ऑपरेशन थिएटर में जाते दिखाई दे रहे हैं। साथ ही शुरुआती उपचार भी आरोपी की ओर से किए जाने की बात सामने आई है।
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अदालत ने मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, सह-अभियुक्त और नर्स के बयानों को ध्यान में रखते हुए माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप हैं। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं थी, फिर भी वह सर्जरी में शामिल रहा। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने जमानत देने से इन्कार कर दिया।