अदालत ने कहा कि यह मंजूरी रबर स्टाम्प जैसी थी। संबंधित अधिकारी को यह बताना चाहिए था कि संबंधित व्यक्ति को पेशेवर या विशेषज्ञ अपराधी क्यों माना गया। कोर्ट ने कहा कि जब किसी कार्रवाई का असर व्यक्ति की स्वतंत्रता पर पड़ सकता है तो स्पष्ट आधार दर्ज करना चाहिए। कोर्ट ने पाया कि हिस्ट्रीशीट खोलने से पहले के पांच वर्षों में याची के खिलाफ कोई नया अपराध दर्ज होने का उल्लेख नहीं था। अदालत ने बी-क्लास हिस्ट्रीशीट खोलने का आदेश रद्द कर दिया।
क्या है बी क्लास हिस्ट्रीशीट
अधिवक्ता हरबंश प्रसाद पांडेय के मुताबिक, ए श्रेणी की हिस्ट्रीशीट में वे अपराधी होते हैं जिन पर दुष्कर्म, डकैती, ट्रेन के डिब्बे काटना, रेलवे की संपत्ति पर बड़ी चोरी, कई हत्याएं करने के मुकदमे दर्ज होते हैं। वहीं, बी श्रेणी की हिस्ट्रीशीट उन अपराधियों के लिए खोली जाती है जो आदतन सामान्य अपराध कर रहे हों और समाज में उनकी छवि खराब हो। उत्तर प्रदेश में बी-क्लास हिस्ट्रीशीट पुलिस निगरानी से संबंधित एक रिकॉर्ड है। यूपी पुलिस रेगुलेशन के पैरा 228 में हिस्ट्रीशीट को ए और बी दो वर्गों में बांटा गया है। बी-क्लास हिस्ट्रीशीट ऐसे पुष्ट एवं पेशेवर अपराधियों के लिए होती है, जो डकैती, सेंधमारी, पशु चोरी और रेलवे मालगाड़ी चोरी से अलग अपराधों में पेशेवर रूप से संलिप्त हों। इसमें पेशेवर ठग, जालसाज, जेबकतरे, नकली सिक्का बनाने वाले, नशीले पदार्थों के तस्कर और पेशेवर गुंडे आदि शामिल किए गए हैं।