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High Court : हाईकोर्ट ने एसिड अटैक मामले में तीन आरोपियों को किया बरी, कहा-संदेह का लाभ मिलना चाहिए

Thu, 25 Dec 2025 04:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एसिड अटैक मामले में तीन आरोपियों काले, बबलू और अनिल को बरी कर दिया है।
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अदालत का आदेश - फोटो : istock
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एसिड अटैक मामले में तीन आरोपियों काले, बबलू और अनिल को बरी कर दिया है।

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बुलंदशहर के खुर्जा देहात थाना क्षेत्र में 13 अगस्त 2010 की मध्यरात्रि को धरपा गांव में बरामदे में सो रहे परिवार पर तेजाब से हमला किया गया था। इसमें राम कुमारी, उनके दो बेटे रूपेश और चंद्र मोहन झुलस गए थे। उपचार के दौरान राम कुमारी की दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। ट्रायल कोर्ट ने मामले में काले, बबलू और अनिल को दोषी करार देेते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को तीनों ने हाईकोर्ट में अपील के माध्यम से चुनौती दी।

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि एफआईआर देरी से दर्ज कराई गई थी। मुख्य गवाहों (मृतक का बेटा रूपेश और बेटी बबिता) के बयानों में गंभीर विसंगतियां मिलीं। दोनों गवाहों ने हमले के तरीके और हमलावरों की भूमिका के बारे में अलग-अलग बातें कहीं, जिससे उनकी विश्वसनीयता संदिग्ध हो गई। यह भी तथ्य सामने आया कि आरोपियों और पीड़ित परिवार के बीच पहले से रंजिश थी।
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अदालत ने माना कि रात में सोते समय हुए इस हमले में आरोपियों को पहचानना मुश्किल था और रंजिश के कारण आरोपियों को गलत तरीके से फंसाया गया हो। कोर्ट ने इस मामले में साक्ष्यों की कमी और विरोधाभासों को देखते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया। 

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