इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के कवि नगर में फर्जी दूतावास चलाने और लोगों से धोखाधड़ी करने के आरोपी हर्षवर्धन जैन की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के कवि नगर में फर्जी दूतावास चलाने और लोगों से धोखाधड़ी करने के आरोपी हर्षवर्धन जैन की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने दिया है।
विज्ञापन
आरोप है कि हर्षवर्धन ने अपने निवास स्थान पर विभिन्न देशों के झंडे और गाड़ियों पर राजनयिक नंबर प्लेट लगाकर फर्जी दूतावास चला रहे थे। पुलिस को छापे के दौरान वहां से कई देशों के पासपोर्ट, आईडी कार्ड, मुहर, विदेशी मुद्रा और महत्वपूर्ण व्यक्तियों के साथ तस्वीरें बरामद की गई थीं। अभियोजन पक्ष का दावा था कि इन प्रतीकों का उपयोग लोगों को ठगने और खुद को राजनयिक के रूप में पेश करने के लिए किया जा रहा था।
आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दायर की। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि बरामद पासपोर्ट और नंबर प्लेट केवल स्मृति चिह्न के रूप में थे, जिन्हें छोटे देशों की ओर से जारी किया गया था। इनका उपयोग कभी भी आधिकारिक यात्रा या किसी को गुमराह करने के लिए नहीं किया गया। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि गाड़ियों पर वास्तविक भारतीय रजिस्ट्रेशन नंबर मौजूद थे। उनके नीचे केवल प्रदर्शन के लिए स्मृति प्लेट्स लगाई गई थीं।
विज्ञापन
आरोपी के पास से मिली नकदी रिश्तेदारों से उधार ली गई थी। उनकी ओर से संचालित 22 कॉरपोरेट संस्थाएं पूरी तरह वैध हैं। वहीं, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। कोर्ट ने पाया कि चार्जशीट 16 अक्तूबर 2025 को दाखिल हो चुकी है। याची 23 जुलाई 2025 से जेल में है। इन आधारों पर याची को सशर्त जमानत दे दी।