इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने नौ साल की देरी से एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में अजनान खान और फुकरान इलाही को सशर्त जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार की खंडपीठ ने दिया है। बुलंदशहर निवासी याचियों पर अक्तूबर 2016 के मामले में पीड़िता ने 2025 में मुकदमा दर्ज कराया था।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि प्राथमिकी घटना के करीब नौ साल बाद दर्ज की गई है। वहीं, पीड़िता के अधिवक्ता ने दलील दी कि फुकरान ने पीड़िता को शादी का झूठा वादा देकर गुमराह किया। इससे प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई। पीड़िता ने 19 अगस्त 2025 को याची फुकरान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जो याची की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी से पहले की थी।