मौजूदा मामले में पीड़ित शारीरिक दर्द, सामाजिक ,आत्मिक पीड़ा, विशेष आहार और विवाह की संभावनाओं के नुकसान का मुआवजा पाने का हकदार है: हाईकोर्ट
बीमा कंपनी की दलील
दुर्घटना दावा न्यायाधिकार के फैसले को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी ने मुआवजा राशि घटाने की मांग की। कहा कि दुर्घटना के वक्त घायल नाबालिग था। बेरोजगार था। उसकी आमदनी नहीं थी। मुआवजे के लिए घायल का 60 से 80 प्रतिशत तक दिव्यांग होना जरूरी है।
बीमा कंपनी की दलील खारिज
कोर्ट ने कहा कि भले ही दुर्घटना के समय पीड़ित नाबालिग था। किसी रोजगार में नहीं था, फिर भी उसे कुशल कामगार की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मुआवजा पाने का अधिकार है। स्थायी विकलांगता के मामलों में व्यक्तिगत खर्चों की कटौती नहीं की जा सकती, क्योंकि यह मृत्यु दावा नहीं बल्कि जीवित घायल का मामला है।