महाकाल के स्वरूप की है मांग
महाकाल का रूप धारण करने वाले सोनू ने बताया कि काशी में होने वाले आयोजनों में उन्हें 61 हजार रुपये मिलते हैं। वहीं, बाहर जाने पर सवा लाख रुपये तक वह लेते हैं। वह अब तक यूपी के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में आयोजित कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं। हर जगह उनके महाकाल के स्वरूप की ही मांग रहती है।
तैयार होने में लगते हैं चार घंटे
इंटर तक की शिक्षा और बीएचयू से संगीत में डिप्लोमा कर चुके सोनू ने बताया कि काशी में निकलने वाली रामलीला की शोभायात्रा से उन्हें स्वांग रचाने की प्रेरणा मिली। महाकाल के रूप में तैयार होने में तीन से चार घंटे लगते हैं और छह से आठ घंटे तक इसी स्वरूप में रहते हैं। सबसे खास बात है कि स्वांग रचाने वाले कलाकार अपना मेकअप भी खुद ही करते हैं।
आकर्षण में है मूंछों का डांस
महाकुंभ में ''दुकानजी'' के नाम से मशहूर राजेंद्र तिवारी की मूंछों के नृत्य के भी लोग कायल हैं। इनका पूरा शरीर एक जगह स्थापित रहता है और मूंछ की भाव-भंगिमा को आकर्षक रूप से प्रदर्शित करते हैं। दारागंज के रहने वाले दुकानजी बताते हैं कि जब वह 17 साल के थे तब माघ के मेले में एक साधु से मिले। साधु उन्हें हिमालय पर ले गए और दो महीने तक साथ रखा। जब वह वापस आने लगे तो साधु ने कहा कि अपनी मूंछ मत कटवाना। उसके बाद से दुकानजी ने मूंछ नहीं कटवाई। इनका नाम 1994 में लिम्का बुक, 1995 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, 2012 में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है।