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कॉलेजों के शिक्षकों, कर्मचारियों को बकाया भुगतान जल्द

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Heigher education directorate
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उच्च शिक्षा निदेशालय ने राजकीय महाविद्यालयों से मांगा ब्यौरा
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कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम, महंगाई भत्ता आदि का मिलेगा लाभ
प्रयागराज। राजकीय महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को जल्द ही उनका बकाया भुगतान मिल जाएगा। इसके लिए उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी राजकीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र जारी कर आवश्यक ब्यौरा मांगा गया है। कॉलेजों को निर्धारित प्रारूप में ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
राजकीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत वेतन निर्धारण तो हो गया लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षकों और शिक्षेणत्तर कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन नहीं मिल सका है। इसके अलावा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के एसीपी, महंगाई भत्ता आदि का भुगतान भी अवशेष है। शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से भुगतान की मांग कर रहे हैं।
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उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा की ओर से सभी राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का जो भी अवशेष वेतन देय हो, उसकी जानकारी निर्धारित प्रारूप पर एक सप्ताह के भीतर ईमेल के माध्यम से निदेशालय को प्रेषित कर दी जाएगी। साथ ही उसकी हार्डकॉपी भी भेज दी जाए। इसके अलावा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सातवें वेतन निर्धारण के फलस्वरूप देय 50 फीसदी अवशेष का भुगतान भी अगर बाकी हो तो अलग से मांग पत्र प्रेषित करें। निर्धारित प्रारूप में महाविद्यालय का नाम, शिक्षक अथवा शिक्षणेत्तर कर्मचारी का नाम और अवशेष धनराशि का विवरण देना है।
सेमिनार, वर्कशॉप कराने में सुस्त रहे कॉलेज
- उच्च शिक्षा निदेशालय को महाविद्यालयों से दोबारा मांगना पड़ा प्रस्ताव
-अपेक्षित प्रस्ताव न मिलने से खर्च नहीं की जा सकी प्राविधानित राशि
प्रयागराज। एक तरह प्रदेश सरकार महाविद्यालयों के शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए सेमिनार, सिम्पोजियम, वर्कशॉप के आयोजन पर जोर दे रही है तो महाविद्यालय इस काम में पूरी तरह से सुस्त पड़े हैं। इस तरह की अकादमिक गतिविधियों के लिए धनराशि की व्यवस्था होने के बाद भी कॉलेज प्रस्ताव नहीं भेज पा रहे। ऐसे में उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र जारी कर दोबारा प्रस्ताव मांगे गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2019-20 में शासन की ओर से एक अप्रैल 2019 को जारी आदेश के अनुपालन में सेमिनार, सिम्पोजियम, वर्कशाप आयोजित कराने के लिए अंतिम तिथि 31 मई 2019 निर्धारित की गई थी। इस आदेश के क्रम में महाविद्यालयों से प्रस्ताव मांगे गए थे, ताकि प्रस्तावों के आधार पर अकादमिक गतिविधियों के आयोजन के लिए धनराशि आवंटित की जा सके लेकिन उच्च शिक्षा निदेशालय को अपेक्षित प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुए थे। ऐसे में आयोजनों के लिए शासन की ओर से जितनी धनराशि का इंतजार किया गया था, उसमें काफी धनराशि अवेशष रह गई।
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अब इस अवधेश धनराशि को खर्च करने के लिए राजकीय महाविद्यालयों से सेमिनार, सिम्पोजियम और वर्कशॉप के आयोजन के लिए दोबारा प्रस्ताव मांगे गए हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से प्राचार्यों को जारी पत्र में कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा के बाद अगर कोई प्रस्ताव आता है तो उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद स्तर पर गठित एक्सपर्ट पैनल उस पर कोई विचार नहीं करेगा। निदेशालय को सेमिनार, सिम्पोजियम एवं वर्कशॉप के लिए जो भी प्रस्ताव मिलेंगे, अवशेष धनराशि के तहत उनके आयोजन के लिए मंजूरी दी जाएगी।
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