उप्र बेसिक शिक्षा परिषद, खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) की नियुक्ति में 31 वर्ष बाद बड़ा बदलाव करने जा रहा है। प्रदेश भर के परिषदीय जूनियर हाईस्कूल और एडेड स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को बीईओ बनने का मौका मिलेगा।
उप्र बेसिक शिक्षा परिषद, खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) की नियुक्ति में 31 वर्ष बाद बड़ा बदलाव करने जा रहा है। प्रदेश भर के परिषदीय जूनियर हाईस्कूल और एडेड स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को बीईओ बनने का मौका मिलेगा। इसके लिए प्रदेश के सभी जनपदों से प्रधानाध्यापकों की वरिष्ठता सूची तैयार की जाएगी।
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लिस्ट तैयार होने के बाद भर्ती प्रक्रिया में प्रधानाध्यापकों के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। इसके लिए प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (बेसिक व माध्यमिक) पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश के बाद अधिकारियों ने बीईओ की भर्ती को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी है। प्रदेश के सभी जनपदों में मौजूदा समय में खंड शिक्षा अधिकारी के कुल 1031 पद हैं। इसमें 691 खंड शिक्षा अधिकारी अलग-अलग जनपदाें में तैनात हैं। अभी 340 पद रिक्त हैं। इसके हिसाब से प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लगभग 103 पद प्रधानाध्यापकों के हिस्से में जाएगा।
प्रधानाध्यापक 1995 से कर रहे थे यह मांग
दरअसल, वर्ष 1995 के पहले प्रधानाध्यापकों को पदोन्नत कर खंड शिक्षाधिकारी बनाने की व्यवस्था थी लेकिन उस समय खंड शिक्षा अधिकारियाें की नियुक्ति में 20 प्रतिशत पदोन्नति करके इसमें शामिल किया जाना था जिसमें 10 प्रतिशत प्रधानाध्यापक और 10 प्रतिशत प्रसार अध्यापक होते थे। 1995 के बाद नियम बंद कर दिया गया था। तभी से प्रधानाध्यापक इसकी मांग कर रहे थे। कुछ प्रधानाध्यापकों ने इसके लिए कोर्ट तक का दरवाजा भी खटखटाया।
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स्कूलों की निगरानी से प्रभावित हो रहा काम
विकासखंड स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारियों की तैनाती होती है। यह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की निर्देशन में अपने विकासखंड में संचालित विद्यालयों की निगरानी करते हैं। प्रदेश में 340 पद खाली होने से कार्य प्रभावित हो रहा है। यही कारण है कि भर्ती प्रक्रिया तेजी से पूरी की जानी है। जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक सर्वेश कुमार सिंह का कहना है कि प्रधानाध्यापकों के लिए यह बड़ा मौका है।