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हेड कांस्टेबल से डिप्टी कलेक्टर बने श्याम बाबू ने बताई सफलता की कहानी, परीक्षार्थियों को दिए सुझाव

Tue, 26 Feb 2019 12:09 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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हेड कांस्टेबल से डिप्टी कलेक्टर बने श्याम बाबू - फोटो : अमर उजाला, प्रयागराज
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श्यामबाबू आज हर उस युवा के लिए मिसाल हैं, जो अपनी नियति, अपनी जिंदगी बदलना चाहते हैं, बदलाव का यह रास्ता कड़ी मेहनत से होकर ही गुजरता है। यूपीपीसीएस का नतीजा आने के बाद प्रयागराज पुलिस हेडक्वार्टर में बतौर सिपाही तैनात श्यामबाबू की दुनिया अब पूरी तरह बदल चुकी है। कुछ दिनों पहले जिन्हें चंद लोग एक हेड कांस्टेबल के रूप में जानतेे थे, लेकिन अब वह डिप्टी कलेक्टर बन प्रयागराज ही नहीं, बल्कि पूरे यूपी में प्रतियोगी छात्रों के रोल मॉडल बन गए हैं। पुलिस की कठिन नौकरी के बीच उनकी इस कामयाबी की चर्चा हर जुबां पर है। श्यामबाबू मानते हैं कि उन्हें यह सफलता पुलिस की नौकरी की बदौलत ही मिली।

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श्यामबाबू अपने ही जैसे अन्य प्रतियोगियों को यह संदेश देना चाहते हैं कि शुरुआत में एक लक्ष्य बनाकर कोई भी सफलता हासिल करें और एक बार स्थायित्व मिलने के बाद बड़ा लक्ष्य बनाएं और सब कुछ त्यागकर लक्ष्य पाने में जुट जाएं। असफलता से घबराने की जरूरत नहीं। दृढ़ संकल्प है तो लक्ष्य जरूर मिलेगा।

बलिया के छोटे से गांव इब्राहिमाबाद निवासी 33 वर्षीय श्यामबाबू आर्थिक तौर पर बेहद कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। परिवार की तंगहाली इस कदर थी कि तीन बहनों को स्कूल तक नहीं भेजा गया। दसवीं पास करने के बाद ही सरकारी नौकरी के लिए हाथ-पांव मारने शुरू कर दिए। अंतत: मेहनत रंग लाई और यूपी पुलिस के हेड कांस्टेबल पद पर भर्ती हो गए। हालांकि सिपाही बनने के बाद भी उन्होंने स्वाध्याय जारी रखा। नौकरी से छुट्टी नहीं मिली तब प्राइवेट ही पढ़ाई जारी रखी। 2010 से उनको पीसीएस परीक्षा देने की धुन सवार हुई।
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दिसंबर 2014 में जब उनकी तैनाती प्रयागराज में हुई तब प्रतिस्पर्धा का माहौल भी मिलने लगा, लेकिन तब तक उनके दिमाग में तस्वीर बहुत साफ नहीं थी। पुलिस में ही प्रोन्नत होकर ऊंचे पद का रास्ता तलाश रहे थे। इसी बीच दरोगा फिजिकल परीक्षा के लिए उनको लखनऊ बुलाया गया। श्यामबाबू के मुताबिक शारीरिक परीक्षा के दौरान जब उन्होंने करीब 20 राउंड पूरे कर लिए, तभी तीन-चार राउंड पहले दिमाग में सवाल कौंधा। अगर उन्होंने यह दौड़ पूरी की तब पीसीएस बनने की दौड़ कभी पूरी नहीं होगी।

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'अंग्रेजी न आना कोई बाधा नहीं'

बकौल श्यामबाबू यही उनका टर्निंग प्वांइट था। उन्होंने उसी दम दौड़ अधूरी छोड़ दी और लौट आए। उसके बाद पीसीएस परीक्षा की ही एक लक्ष्य बनाकर तैयारी शुरू कर दी। पुलिस की ड्यूटी के बीच समय न मिलने से वह कोई कोचिंग भी नहीं कर सके। ऐसे में प्रतियोगी छात्रों के बीच किराए में कमरा लेकर रहना शुरू किया। डेलीगेसी में रहकर उनसे नोट्स लेकर तैयारी करते रहे। श्यामबाबू के मुताबिक दिमाग में लक्ष्य साफ रहने से तैयारी करने में आसानी रही। अब तक अविवाहित श्यामबाबू के मुताबिक उन्होंने इतने वर्षों में यह चीज बखूबी सीखी कि कभी असफलता से घबराना नहीं चाहिए। असफलताओं ने उनका भी पीछा किया, लेकिन उन्होंने उसे कभी हावी नहीं होने दिया। श्यामबाबू का फिल्मी शौक सिर्फ मोबाइल तक ही सीमित है।

परीक्षार्थियों को दिए ये सुझाव
1. असफलता से कभी न घबराएं, दृढ़ संकल्पी बनें
2. छोटे लक्ष्य बनाकर भी पा सकते बड़ा लक्ष्य
3. कोचिंग के सहारे न रहें, स्वाध्याय पर दें ध्यान

श्यामबाबू अंग्रेजी के कम ज्ञान को पीएसएस परीक्षा की राह में कोई बाधा नहीं मानते। उनका कहना है अंग्रेजी में पकड़ न होने के बावजूद इस परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है। इंटरव्यू के बारे में उन्होंने बताया कि करेंट अफेयर्स के अलावा चुने गए विषय पर समग्र जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए। इसी तैयारी के आधार पर पीसीएस परीक्षा की राह आसान बनाई जा सकती है। 
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