उनके कहने पर आरटीजीएस, नकद और यूपीआई के माध्यम से कुल 14 लाख रुपये दे दिए। कौशलेश ने फोन पर कहा कि बेटा टीजीटी परीक्षा में पास हो गया है। इसके कुछ दिन बाद मिर्जापुर में बेटे के घर के पते पर डाक के माध्यम से प्रयागराज माध्यमिक शिक्षा परिषद का एक नियुक्ति पत्र मिला। इस पर उत्तर प्रदेश अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) के हस्ताक्षर भी बनाए गए थे। इस पत्र में सोनभद्र चहिरया राजकीय हाईस्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति की बात लिखी थी। बेटा गया तो पता चला कि इस पते पर इस नाम का विद्यालयही नहीं है।
सोनभद्र में नहीं है विद्यालय
शिकायत करने पर कौशलेश ने कहा कि पता गलत टाइप हो गया है और जल्द ही दूसरा नियुक्ति-पत्र दिया जाएगा। दूसरा पत्र आया तो इसमें गांव का नाम चकरिया था। जांच करने पर पता लगा कि सोनभद्र में इस नाम का भी कोई विद्यालय नहीं है। जांच करने पर पता चला कि नियुक्ति-पत्र फर्जी है। जब रुपये वापस मांगे गए तो एक महीने में लौटाने का आश्वासन दिया। शिकायत में बताया कि वर्तमान में मोहम्मद जमाल अख्तर लखनऊ के गुडंबा थाना क्षेत्र में रहता है। वहीं, सिविल लाइंस थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने बताया प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।