देवरिया शेल्टर होम की अंत:वासियों के यौन उत्पीड़न और शोषण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई से जांच की प्रगति रिपोर्ट तलब की है। साथ ही प्रदेश के सभी शेल्टर होम के संबंध में व्यापक निर्देश भी दिए हैं।
कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि प्रदेश के सभी शेल्टर होम के रखरखाव, उनकी सुरक्षा और वहां रह रहीं अंत:वासियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवसायिक प्रशिक्षण आदि के संबंध में अपनी कार्य योजना अदालत में प्रस्तुत करें। कोर्ट ने कहा कि सभी शेल्टर होम में सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने और उनके रखरखाव की प्रक्रिया के संबंध में भी अवगत कराएं।
स्वत: योजित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने सरकार से पूछा कि शेल्टर होम्स में मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रशासन और प्रबंधन कि क्या कार्य योजना है? इसे अदालत में प्रस्तुत किया जाए।
सहायक शासकीय अधिवक्ता सैय्यद अली मुर्तजा ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी कोर्ट में दी। अंत:वासियों को विधिक सहायता, व्यवसायिक प्रशिक्षण और चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने के संबंध में उचित व्यवस्था कर जानकारी मुहैया कराने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने पूर्व में सभी जिला जजों को अपने-अपने जिलों में एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित कर शेल्टर होम्स का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया था। महानिबंधक से इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी है। मॉनिटरिंग कमेटी की मासिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने प्रदेश सरकार से यह भी पूछा है कि प्रदेश में शेल्टर होम संचालित करने के लिए उसने क्या नियम या योजना बनाई है तथा उसमें रहने वाली अंत:वासियों की भौतिक और भावनात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी। कोर्ट ने देवरिया शेल्टर होम की लड़कियों के पुनर्वास के संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है।
गौरतलब है कि देवरिया के शेल्टर होम में रहने वाली अंत:वासियों के यौन शोषण का मामला पिछले साल सामने आने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई प्रारंभ की थी।
कोर्ट के निर्देश पर इस मामले का खुलासा करने वाली तीन लड़कियों को एक अज्ञात सुरक्षित स्थान पर रखा गया तथा अन्य लड़कियों के पुनर्वास के संबंध में व्यापक निर्देश पारित किए गए थे।