महानवमी पर शुक्रवार को शक्तिपीठों में भगवती के नवम सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा अर्चना की गई। देवी के नवम रूप के पूजन और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन का क्रम आरंभ हुआ जो देर रात चलता रहा। घरों और शक्तिपीठों में कन्याभोज भी कराया गया। महाअष्टमी का व्रत रखने वालों ने नवमी को हवन किया। अनेक व्रतियों ने पूजन हवन और कन्याओं को खिलाने के पास पारण किया तो अनेक व्रती नवमी के बाद दशमी को पारण करेंगे।
मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में भगवती बहुरंगी फूलों और सोने-चांदी के आभूषणों से सजीं। भगवती के पूजन और शाम को शृंगार दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी। अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा और महामंत्री धीरज नागर की देखरेख में मंदिर में अनेक अनुष्ठान हुए। देवी गीतों की भी धूम रही। सर्वमंगल के कल्याण के लिए आहुतियां डाली गईं।
भगवती कल्याणी का आभूषणों और फूलों से शृंगार किया गया। आधीरात के बाद तक लोगों ने शृंगार दर्शन किया। अध्यक्ष सुशील पाठक, व्यवस्थापक श्याम जी पाठक की देखरेख में परिसर में मुंडन, कर्णछेदन आदि अनुष्ठान हुए। शक्तिपीठ अलोपीदेवी में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालु भगवती का पालना झुलाने के लिए आए। वहीं निशान चढ़ाने के लिए सुबह से ही तांता लगा और देर शाम तक जारी रहा। परिसर में मुंडन, कर्णछेदन, अनुष्ठान भी हुए। इसी क्रम में चौक गंगादास स्थित खेमामाई मंदिर सहित करेली नयापुरवा स्थित सिद्धपीठ मां काली के प्राचीन मंदिर, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, कर्नलगंज, कटरा कालीथान, हाईकोर्ट चौराहा स्थित हनुमान मंदिर, अष्टभुजी मंदिर, हनुमत निकेतन दुर्गा मंदिर, सिद्धेश्वरी गुप्त महापीठ, चौफटका, समियामाई आदि मंदिरों में दुर्गा सप्तशती, शतचंडी, देवीगीत हुए। श्रद्धालु दर्शन को उमड़े।