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हठयोग : महाकुंभ में पहुंचे महंत महेश, 11 माह से उर्द्धबाहु कर रहे तपस्या., 12 फीट की जटा रखते हैं विजय गिरि

Mon, 30 Dec 2024 04:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

राधे पुरी महाराज बताते हैं कि महंत महेश गिरि 12 साल की उम्र में अपना घर द्वार छोड़कर संन्यासी बन गए थे। उसके बाद से वह गुरु सेवा और परमात्मा की भक्ति में रम गए। 2011 से वह विश्व शांति और जन कल्याण के लिए अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाकर तपस्या शुरु किए थे, अब उनकी तपस्या का 14 साल गया है।
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11 साल से एक हाथ उठाकर तपस्या कर रहे महंत महेश गिरि। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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महाकुंभ से पहले ही संगम की रेती पर साधु-संतों की बसावट शुरु हो गई है। संतों के अखाड़ों में तरह-तरह के संन्यासियों के रूप देखने को मिल रहे हैं। इसी तरह जूना अखाड़े में उज्जैन कोटा रोड के अनन्य धाम से आए राधे पुरी महाराज हैं, जिन्होंने विश्व कल्याण के लिए 14 साल से दाहिना हाथ उठाए रहने का हठ योग किया है।

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राधे पुरी महाराज बताते हैं कि वह 12 साल की उम्र में अपना घर द्वार छोड़कर संन्यासी बन गए थे। उसके बाद से वह गुरु सेवा और परमात्मा की भक्ति में रम गए। उन्होंने बताया कि 2011 से वह विश्व शांति और जन कल्याण के लिए अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाकर तपस्या शुरु किए थे, अब उनकी तपस्या का 14 साल गया है। वह कहते हैं कि वह हठ योग तपस्या के बल पर अपनी इंद्रियों को वश में कर लिए हैं। संकल्प के इन 14 सालों में एक बार भी उनका हाथ नीचे नहीं आया और एक ही हाथ से पूरा दैनिक कार्य करते हैं।

परोपकार के लिए गए कार्य में कोई बाधा नहीं आती

तपस्या के 14 सालों में क्या कभी आपकी तपस्या भंग हुई? इस सवाल के जवाब में राधे पुरी महाराज कहते हैं जब कोई कार्य परोपकार के लिए किया जाता है तो उसमें कोई परेशानी नहीं आती है जब हम अपने लिए कार्य करते हैं तो उसमें परेशानी आती है।

12 साल खड़ी तपस्या व सात साल पंच धुनी की कर चुके हैं तपस्या

संत बताते हैं कि वह बाल्यावस्था से घर छोड़ दिए। पांच तक पढ़ाई किए हैं। इसके बाद उनका पूरा जीवन गुरू आश्रम में ही बिता। हाथ ऊपर करके तपस्या करने से पहले वह 12 साल तक खड़ी तपस्या किए, जिसमें वह 24 घंटे खड़े रहते थे। इसके बाद सात साल तक अग्नि के सामने धुनी तपस्या किए। वह कहते है कि हम साधु संन्यासी हैं हमसे पहले भगीरथ ने तपस्या कर गंगा जी को लाए थे। यह कार्य आज से नहीं जबसे श्रृष्टि की रचना हुई है तब से यह विश्व कल्याण के लिए जप तप किया जा रहा है। अंत में राधे पुरी महाराज सभी सनातनियों को महाकुंभ में आने का संदेश देते हुए कहते हैं प्रयागराज सभी राजाओं का तीरथ है सभी यहां आकर अपने और जन कल्याण की कामना करना चाहिए।

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12 फीट की जटा रखने वाले महंत विजय गिरि। - फोटो : अमर उजाला।
पांच फीट से बड़ी जटाएं बनीं आकर्षण का केंद्र

साधु-संन्यासियों के जप-तप संग उनकी वेशभूषा भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है। बरेली से आए जूना अखाड़े के महंत विजय गिरि की पांच फीट से बड़ी जटाएं भी लोगों में उत्सुकता पैदा कर रही हैं। उनका कहना है कि पिछले 24 साल में ये जटा तैयार हुई है।

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