पुराणों में कहा गया है कि त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहते हैं, 12वें वर्ष में कुंभ का और छठवें वर्ष में अर्धकुंभ का त्रिवेणी संगम पर विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समागम अद्भुत और अविस्मरणीय होता है। इसकी महिमा अपरंपार है।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में संगम को स्थान दिलाने की अमर उजाला की मुहिम से श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा भी जुड़ गया है। जूना अखाड़ा सभी 13 अखाड़ों में सबसे बड़ा है। इसमें 5.50 लाख से अधिक नागा संन्यासी हैं। अखाड़े के संरक्षक श्री महंत हरि गिरि ने कहा कि संगम विश्व की अनमोल धरोहर है। ऐसी त्रिवेणी न कहीं है औ न कहीं हो सकती है।
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इसे संरक्षित करने के साथ ही धरोहर घोषित कराने के लिए जरूरत पड़ने पर संघर्ष भी किया जाएगा। जूना अखाड़े के संरक्षक ने कहा बताया कि संगम जैसी महिमा पृथ्वी पर किसी भी तीर्थ की नहीं है।संगम पर वेणीमाधव, सोमेश्वर, भरद्वाजेश्वर, नागवासुकि, अक्षयवट जैसे तीर्थों के दर्शन से जीवन धन्य हो जाता है।
पुराणों में कहा गया है कि त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहते हैं, 12वें वर्ष में कुंभ का और छठवें वर्ष में अर्धकुंभ का त्रिवेणी संगम पर विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समागम अद्भुत और अविस्मरणीय होता है। इसकी महिमा अपरंपार है।
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महंत हरि गिरि ने कहा कि इसी महाकुंभ में संगम को विश्व धरोहर घोषित कर दिया जाना चाहिए। 45 करोड़ से अधिक भक्तों के आने का अनुमान है। यह मेला सद्भाव, सौहार्द, सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। यह छुआछूत, जातीयता और सांप्रदायिकता से परे है। यह सहिष्णुता और मानवता की मिसाल है। इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया ही जाना चाहिए।