रंगों का पावन पर्व होली केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। खुशियों का कोई मजहब नहीं होता। यही संदेश लालगोपालगंज की साझा संस्कृति में रचा-बसा है। होली के मद्देनजर कस्बे के जनप्रतिनिधियों व संभ्रांत नागरिकों ने एक सुर में क्षेत्रवासियों से प्रेम और सौहार्द के साथ त्योहार मनाने की अपील की है।
लालगोपालगंज में आयोजित होने वाला दो दिवसीय होली का पर्व हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की जाती रही है। यहां लोग एक-दूसरे को अबीर लगाकर गले मिलते हैं। सभी ने विश्वास जताया कि लालगोपालगंज की जनता अपनी परंपरा के अनुरूप शांतिपूर्ण और हर्षोल्लास के साथ होली मनाएगी।
- होली का पर्व हमें पुराने गिले-शिकवे भुलाकर नए सिरे से रिश्ते जोड़ने का अवसर देता है। हमारी गंगा-जमुनी तहजीब ही हमारी ताकत है। इसे मिलजुल कर मनाएं। - मुख्तार अहमद, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि
- रंगों में कोई धर्म नहीं होता। लालगोपालगंज की धरती ने हमेशा मोहब्बत का पैगाम दिया है। इस बार भी हम मिठास व भाईचारे के साथ मिसाल कायम करेंगे। - प्रदीप केसरवानी, पूर्व चेयरमैन
- त्योहारों का असली अर्थ प्रेम साझा करना है। प्रेम का रंग सबसे गहरा होता है, इसे अपने व्यवहार में लाएं। युवाओं को चाहिए कि प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें, जबरन किसी पर रंग न डालें। - शिवलाल गुप्ता (चुन्ना), व्यापारी
- व्यापार हो या समाज, विश्वास और सौहार्द ही उन्नति की कुंजी है। होली पर हम सभी एक-दूसरे के घर जाकर खुशियां साझा करेंगे। खुशियों का कोई मजहब नहीं होता। - जव्वार अहमद अंसारी, महामंत्री, व्यापार मंडल