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Prayagraj News: मूल अक्षयवट के परिपथ से जुड़ेगा हनुमान मंदिर कॉरिडोर, सरस्वती कूप का दर्शन द्वार अलग

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इस बार के महाकुंभ में मूल अक्षयवट के परिपथ में बड़ा बदलाव किया जाएगा। महाकुंभ में देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु मूल ज्ञान की गहरी जड़ों के रूप में अक्षयवट के दर्शन के बाद उस परिपथ से सरस्वती कूप नहीं जाएंगे। संगम पर बन रहे हनुमान मंदिर कॉरिडोर को इस परिपथ में शामिल किया जाएगा। इस कॉरिडोर के निर्माण पर करीब 18.21 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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संगम पर स्थित आयुध भंडार डिपो में स्थित अक्षयवट, पातालपुरी, सरस्वती कूप और जोधाबाई अकबर वाटिका के सौंदर्यीकरण और निर्माण स्मार्ट सिटी परियोजना के जरिए कराया जा रहा है। इस परियोजना को इसी जून महीने तक पूरा करना था, लेकिन अभी तक 40 फीसदी ही निर्माण कराया जा सका है। इस परियोजना के परिपथ में आने वाले महाकुंभ में बड़ा बदलाव होगा।
पहले श्रद्धालु मूल अक्षयवट के परिक्रमा पथ पर एक तरफ से प्रवेश कर दूर से दर्शन करते हुए उसी पथ की दूसरी लेन से होकर वापस किले के भीतर पातालपुरी के बाद सरस्वती कूप में प्रवेश करते थे। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। अब पातालपुरी में ऋषि, मुनियों, नवग्रहों के साथ ही गंगा,यमुना, सरस्वती समेत अनेक देवी-देवताओं के दर्शन के बाद श्रद्धालु सीधे गंगा द्वार से किले के बाहर निकलेंगे।
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वहां से वह हनुमान मंदिर कॉरिडोर में लेटे हनुमान के दरबार में हाजिरी लगाएंगे। इसके बाद वहां से त्रिवेणी मार्ग पर बाहर निकलकर कुष्ठ रोगियों के आश्रय के पास से पीछे के रास्ते से दोबारा किले में प्रवेश कर सरस्वती कूप जाएंगे। वहां सरस्वती कूप में मां सरस्वती की प्रतिमा के दर्शन के साथ ही कूप की परिक्रमा कर महाकुंभ मेले की छटा निहारेंगे। इस परियोजना के तहत अक्षयवट जाने के लिए मुख्य प्रवेश द्वार का भी निर्माण कराया जा रहा है। यह प्रवेश द्वार अक्षयवट पथ को जोड़ेगा। इसके बाद नए सिरे से मूल अक्षयवट तक जाने के लिए डबल लेन का रैंप और पाथवे बनाया जा रहा है।

जोधाबाई की स्मृतियों को भी सहेजने की योजना

प्रयागराज। इस परियोजना के तहत जोधा बाई अकबर की यादों को भी संजोया जाएगा। किला परिसर में जोधाबाई वाटिका का निर्माण कराया जाएगा। इस वाटिका में शोभाकार और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इस किले में जोधाबाई का महल सबसे खास है।
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