क्षेत्र के गांवों में रविवार को शाम ओलावृष्टि होने से किसानों की गेहूं की फसल चौपट हो गई। इससे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें देखी गई।
खीरी, खपटिहा, डिहार, जोरवट और पाठकपुर आदि गांवों में ओलावृष्टि से गेहूं की तैयार पकी फसल चौपट हो गई। पाठकपुर के दयाशंकर शुक्ल, डिहार के पिंटू ओझा, पूरा दत्तू के संतोष द्विवेदी, छापर के विजय तिवारी और टौंगा गांव के प्रकाश मिश्रा आदि किसानों ने बताया कि विगत एक सप्ताह से मौसम का मिजाज बदलने से उनकी गेहूं की फसल नष्ट हो गई थी। रविवार को ओलावृष्टि होने से गेहूं की बालियां टूटकर बिखर गई। किसानों ने डीएम से स्थलीय टीम भेजकर नुकसान का सत्यापन करने एवं क्षतिपूर्ति देने की मांग की है।
वहीं, लालापुर और शंकरगढ़ में तेज हवा और बारिश से किसानों की गेहूं, चना, मसूर, सरसों सहित दलहन फसलों पर असर पड़ा है। शंकरगढ़ के गोबरा हेवार, कपारी, तालापार, हिनौती, कटरा, सोनवर्षा आदि गांवों के किसानों में चिंता छाई है। पहाड़ी गांव के समरेंद्र, जूही के श्रीनाथ सिंह, राजेंद्र सिंह, डेराबारी के जगत राज सिंह, लालापुर के विवेक शुक्ल, नगरवार के राम गणेश पाठक आदि ने बताया कि अगर फसल का मुआवजा नहीं मिला तो कर्ज लेकर खेती करने वाले बर्बाद हो जाएंगे।
इधर, लेड़ियारी में ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। देवरी, पथरपुर, लेड़ियारी, डीही खुर्द, बहरैचा और नीबी आदि क्षेत्र के गांवों में ओलावृष्टि से फसलों का नुकसान हुआ है। किसान विष्णु प्रताप सिंह, रत्नेश कुमार, त्रियुगी नारायण मिश्र, अखिलेश मिश्र, विनीत कुमार, बद्री प्रसाद पांडेय आदि किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि से लागत निकालना मुश्किल लग रहा है।
किसानों ने कहा-छह महीने की मेहनत बर्बाद
क्षेत्र में आंधी-तूफान के साथ ओले गिरने से किसानों की छह महीने की मेहनत बर्बाद हो गई। ओले गिरने से महुली, संसारपुर, नेवढ़िया और मुरलीपुर आदि गांवों में नुकसान हुआ है। किसानों का दावा है कि लगभग 50 फीसदी फसलें नष्ट हुई हैं।