वसंत पंचमी के अमृत स्नान में नहीं लिया था हिस्सा
उन्होंने भी आपत्ति जताते हुए ममता समेत महामंडलेश्वर की पदवी देने के आरोप में आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को भी पद से हटा दिया। शंकराचार्य समेत अन्य संतों ने महामंडलेश्वर बनाए जाने की गलत परंपरा बनाए जाने पर नाराजगी जताई। संत-समाज के विरोध के चलते ममता तीसरे अमृत स्नान में शामिल नहीं हुईं। दूसरे अमृत स्नान के बाद ही वह महाकुंभ नगर से वापस लौट गईं।
इसके बाद से उन्होंने किन्नर अखाड़े से दूरी बना ली थी। सोमवार को वीडियो जारी करते हुए ममता कुलकर्णी ने कहा कि उन्होंने 25 साल तप किया। वह आगे भी साध्वी रहेंगी। इस दौरान उन्होंने अपने गुरू श्री चैतन्य गगन गिरि का नाम लेते हुए कहा कि एकमात्र सिर्फ वह सिद्ध गुरू हैं। बाकी के अंदर अंहकार छिपा है। उधर, ममता के इस्तीफा दिए जाने को लेकर आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने किसी तरह की अभी टिप्पणी करने से इन्कार किया है।