ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रदोष तिथि बृहस्पतिवार को पड़ रही है। इस कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला अत्यंत शुभ व्रत माना जाता है।
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रदोष तिथि बृहस्पतिवार को पड़ रही है। इस कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला अत्यंत शुभ व्रत माना जाता है। पं. जय मिश्रा ने बताया कि गुरु प्रदोष व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। साथ ही संतान और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिलने की मान्यता है। सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना सबसे फलदायी माना गया है।
विज्ञापन
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त
शाम 06:04 बजे से रात 09:12 बजे तक
तिथि प्रारंभ : 14 मई सुबह 07:38 बजे
तिथि समाप्त : 15 मई सुबह 05:56 बजे
ऐसे करें गुरु प्रदोष व्रत की पूजा
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। संध्या के समय भगवान शिव का गंगाजल, दूध और शहद से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और प्रदोष व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।