इलाहाबाद। डिस्कोथेक, बीयरबार और रियल स्टेट कारोबार से जुड़े नोएडा के सचिन दत्ता ने महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरि बनने तक अपने से जुड़े सभी तथ्यों को लेकर निरंजनी अखाड़े के पदाधिकारियों को अंधेरे में रखा था। आरोपों की जांच के लिए बनी कमेटी के वरिष्ठ सदस्य महंत दिनेश गिरि ने अमर उजाला से बातचीत में माना कि सच्चिदानंद की ओर से कार्यव्यवहार से जुड़े तथ्यों को छिपाया गया। जांच में परिवार से जुड़ाव सहित कई अन्य मुद्दे सही पाए गए। उनके गुरु कैलाशानंद की ओर से भी सही तथ्यों को नहीं प्रस्तुत किया गया।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि उसे अखाड़े से हटा दिया गया है। अब वह सामान्य साधु की तरह है। वह सेक्टर-41 स्थित सी- 112 वाले बंगले को आश्रम बनाने की कवायद कर रहे हैं। घर लौटने और घर को ही आश्रम बनाने की बात संन्यास की परंपरा से इतर है। जहां तक अखाड़े से जुड़ाव और महामंडलेश्वर के रूप मे वापसी की बात है तो यह भविष्य तय करेगा। यदि लंबे समय यदि वह संन्यास की परंपरा और आचरण की कसौटी पर खरा उतरता है, तभी उसकेबारे में किसी तरह का विचार किया जा सकेगा। फिलहाल उसे निष्कासित कर दिया गया है।
निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि शुक्रवार को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मुलाकात करेंगे। उनके मुताबिक शंकराचार्य जी से मुलाकात के दौरान सच्चिदानंद से जुड़े प्रकरण के बारे में पूरी जानकारी देने के साथ ही कुंभ पर्व की तैयारियों सहित आयोजन से जुड़े अन्य विषयों पर विमर्श किया जाएगा।