इलाहाबाद। दुनिया के 169 देशों में लागू जीएसटी अब तक का अंतिम कर सुधार है। जीएसटी सही अर्थों में लागू हुआ तो पूरे देश को एक मंडी के रूप में विकसित करेगा। माल एवं सेवाओं से प्राप्त की गई जीएसटी को बिक्री की जीएसटी से समायोजित किया जाएगा। इसके लागू होने पर केंद्र और राज्य सरकार के कई टैक्स समाप्त होंगे। ये बातें कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की पूर्वी उत्तर प्रदेश की इकाई की ओर से रविवार को ‘जीएसटी एवं कैशलेस इकनॉमी’ विषय पर आयोजित सेमिनार में कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं जीएसटी एम्पावर्ड कमेटी के सदस्य एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहीं।
सिविल लाइंस स्थित एक होटल में हुए सेमिनार में कई कंपनियों के प्रतिनिधि, जीएसटी एम्पावर्ड कमेटी के सदस्य एवं कैट के राष्ट्रीय पदाधिकारी शामिल हुए। जीएसटी की विसंगतियों को लेकर कमेटी के सदस्य को ज्ञापन भी सौंपा गया। इस मौके पर मास्टर कार्ड के साउथ ईस्ट एशिया के वाइस प्रेसीडेंट रोहन मिश्रा ने कैशलेस व्यापार के बारे में विस्तार से चर्चा की। एचडीएफसी के वाइस प्रेसीडेंट उत्तम सिंह अहलूवालिया ने कहा कि पीएम मोदी के विजन कैशलेस इकनॉमी को आगे बढ़ाने में बैंक ग्राहकों को सभी सुविधाएं दे रहा है। व्यापारियों को ई-कॉमर्स पर अपनी दुकानें खोलने के लिए ई-लाला के साथ टाईअप किया गया है। एकाउंटिंग सपोर्ट पर बिजी कंपनी के जीएम एसपी रंजन एवं संदीप अग्रवाल ने कहा कि अब कंप्यूटराइज्ड बिलिंग का दौर होगा। अतिथियों का स्वागत डॉ.बीबी अग्रवाल तथा संचालन कैट पूर्वी के अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने किया। सेमिनार पीयूष अग्रवाल, रिषी केसरवानी, विभू अग्रवाल की देखरेख में हुआ। इसमें कैट के मंत्री संजय पटवारी, पंकज अरोरा समेत बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हुए।
0एक देश एक कर एक प्राधिकरण के आधार पर हो लागू
कैट ने सीजीएसटी, आईजीएसटी एवं एसजीएसटी के रूप में तीन प्रकार के जीएसटी का विरोध किया है। कैट की मांग है कि एक देश एक कर एक प्राधिकरण के आधार पर जीएसटी लागू होना चाहिए। व्यापारियों का सबसे बड़ा मुद्दा 31 मार्च को स्टॉक का है, जिस पर उसने एक्साइज, वैट, सर्विस टैक्स अदा किया हुआ है। उसका जीएसटी में क्या होगा, उस माल पर आईटीसी मिलेगा, यदि ऐसा नहीं हुआ तो बचे माल पर जीएसटी लगने से वह बहुत मंहगा हो जाएगा।
0सेल-पर्चेज की जगह सप्लाई शब्द का होगा इस्तेमाल
सेमिनार में व्यापारियों को बताया गया कि जीएसटी में सेल-पर्चेस की जगह सप्लाई शब्द का इस्तेमाल होगा। व्यापारी को आउटवर्ड सप्लाई के लिए माह समाप्त होने के 10 दिन के अंदर जीएसटीआर-1, इनवर्ड सप्लाई के लिए जीएसटीआर-2 15 दिन के अंदर तथा जीएसटीआर-3 माह समाप्त होने के 20 दिन के अंदर जमा करना होगा।
0सिस्टम से बाहर रहकर कारोबार करने वाले होंगे परेशानी
ज्वाइंट कमिश्नर जीएसटी एके माहेश्वरी ने बताया कि इस व्यवस्था केअंतर्गत सिस्टम को अपनाने वाले व्यापारियों को फायदा होगा लेकिन सिस्टम से बाहर रहकर कार्य करने वालों की परेशानी बढ़ेगी। कहा कि कोई भी नई व्यवस्था अपनाने में प्रारंभ में समस्याएं आती हैं। व्यापारी विभाग से संपर्क कर इसका समाधान करा सकते हैं। व्यापारियों को वाणिज्य कर विभाग में पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।
ज्ञापन में मांग
0 बिना जीएसटीएन के व्यापार प्रतिबंधित हो
0 थरैश होल्ड लिमिट केअंदर आने वाले दुकानदारों के लिए जीएसटीएन अनिवार्य
0 आईजीएसटी को समाप्त किया जाए
0 तीन के स्थान पर एक रिटर्न भरने की व्यवस्था
0 मासिक रिटर्न की जगह वैट की तरह तिमाही रिटर्न की व्यवस्था
0 तीन साल के समय को ट्रांजिशन पीरियड माना जाए और पेनाल्टी की कार्रवाई न हो
0 लोकपाल का गठन, जीएसटी काउंसिल में व्यापारियों का प्रतिनिधि