इलाहाबाद। ‘अमर उजाला फाउंडेशन’, ‘भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम’ (एलिम्को) और एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज (एबीआईसी) की संयुक्त पहल पर 22 मार्च को आयोजित किए जाने वाले ‘सबसे बड़े नि:शक्तजन सहायता शिविर’ के क्रम में बृहस्पतिवार (26 फरवरी) को लगे दूसरे नि:शक्तता (विकलांगता) प्रमाणपत्र कैम्प में प्रमाणपत्र बनवाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। आलम यह रहा है कि दूसरे कैम्प ने पहले शिविर का भी रिकार्ड तोड़ दिया। कैम्प में रिकार्ड 590 नि:शक्तजनों को टोकन बांटे गए और प्रमाणपत्र बनवाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराए।
131 नि:शक्तजनों को तो मौके पर ही प्रमाणपत्र बनाकर जारी कर दिए गए और बाकी को जांच के लिए एसआरएन के अलग-अलग विभागों में भेजा गया। जांच रिपोर्ट आने पर उनके प्रमाणपत्र भी जारी किए जाएंगे। जो लोग कैम्प में नहीं आ सके, उनके पास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अब भी मौका है। प्रमाणपत्र बनवाने के लिए इसी तरह के दो कैम्प और लगेंगे। ऐसे में प्रमाणपत्र से वंचित रह गए नि:शक्तजन इन शिविरों में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं।
एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में 22 मार्च को आयोजित होने वाले नि:शक्तजन सहायता शिविर में उन्हीं नि:शक्तजनों को व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, बैसाखी, सुनने की मशीन सहित अन्य सुविधाएं मिलेंगी, जिनके पास नि:शक्तता प्रमाणपत्र होंगे। इसी क्रम में प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दूसरा कैम्प बृहस्पतिवार को स्टेनली रोड पर बेली हॉस्पिटल के बगल में स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में आयोजित किया गया। इस कैंप में विकलांग बोर्ड के सदस्य डॉ. दया शंकर चौधरी, डॉ. महानंद यादव, डॉ. विनय यादव, डॉ. एमके अखौरी, डॉ. अशोक पटेल एवं डॉ. अनिल कुमार ने नि:शक्तजनों का परीक्षण किया।
शिविर शुरू होने का वक्त सुबह दस बजे से निर्धारित था लेकिन प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नौ बजे से ही वहां नि:शक्तजनों और उनके परिजनों की भीड़ लगने लगी। लाइन इतनी लंबी थी कि सीएमओ ऑफिस के गेट के बाहर तक चली गई। नि:शक्तजनों की सहूलियत के लिए उन्हें लाइन में ही टोकन बांट दिए गए। ऐसे में टोकन के लिए काउंटर में अपना नंबर आने का इंतजार नहीं करना पड़ा और टोकन उनके पास ही पहुंचा दिया गया। शिविर का संचालन दोपहर दो बजे तक होना था लेकिन भीड़ इतनी अधिक थी कि शाम साढ़े चार बजे तक बोर्ड के सदस्य जांच करने और प्रमाणपत्र जारी करने के काम में लगे रहे।
टोकन जारी करने, प्रमाणपत्र वितरण सहित अन्य कार्यों में सीएमओ कार्यालय के कर्मचारी वीके शर्मा, रघुवीर, शोभनाथ, कुलदीप, सीएल गुप्ता, मनोज और प्रमोद का विशेष योगदान रहा। कैंट पुलिस ने भी इसमें सहयोग किया। सीएमओ डॉ. पद्माकर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कैम्प का संचालन एसीएमओ डॉ. आरके श्रीवास्तव ने किया। कैम्प के दौरान बोर्ड के सदस्यों ने 590 में 106 नि:शक्तजनों को मौके पर ही प्रमाणपत्र बनाकर दे दिए गए और बाकी को एसआएन अस्पताल के नेत्र विभाग, ईएनटी विभाग और मस्तिष्क रोग विभाग में जांच के लिए भेज दिया। ये लोग 12 मार्च को सीएमओ ऑफिस में ही आयोजित तीसरे कैम्प में जांच रिपोर्ट सहित आकर प्रमाणपत्र बनवा सकते हैं।
बताते चलें कि गत 19 फरवरी को आयोजित पहले कैम्प में 340 लोगों ने विकलांगता प्रमाणपत्र के लिए रजिस्ट्रेन कराए थे, जिनमें से 106 को मौके पर ही प्रमाणपत्र दिया गया था। बृहस्पतिवार को आयोजित दूसरे कैम्प में यह रिकार्ड टूट गया और इस बार अधिक संख्या में नि:शक्तजनों को प्रमाणपत्र जारी किए गए। अब अगला एवं तीसरा कैम्प 12 और चौथा एवं अंतिम कैम्प 19 मार्च को सीएमओ ऑफिस में आयोजित किया जाएगा, जिसमें सिर्फ इलाहाबाद जिले के ही निवासियों के नि:शक्तता प्रमाणपत्र बनेंगे और प्रमाणपत्र पाने वाले नि:श्क्तजनों को 22 मार्च को आयोजित नि:शक्तजन सहायता शिविर में एक ही छत के नीचे वे सभी सुविधाएं मिलेंगी, जिसके वे हकदार हैं। शिविर के दौरान सुविधाएं उन्हीं नि:शक्तजनों को दी जाएंगी, जिनके पास विकलांगता प्रमाणपत्र हैं, मासिक आय 15 हजार रुपये या उससे कम है और पिछले छह माह में उन्होंने इन सुविधाओं का लाभ न लिया हो।