कोरोना को मात देने के बाद अब ‘तमिल के तुलसी’ डॉ.एम.गोविंदराजन रविवार को फ्लाइट से तमिलनाडु के तंजाउर स्थित अपने घर जाएंगे। शनिवार को दोपहर में उनके दामाद एस.बालाकृष्णन उन्हें साथ ले जाने के लिए प्रयागराज पहुंचे। सूचना पर उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने डॉ.गोविंदराजन और उनके दामाद, दोनों का इंडिगो की फ्लाइट से टिकट बुक कराया। दोनों 16 मई की शाम को प्रयागराज एयरपोर्ट से बेंगलुरू की फ्लाइट से रवाना होंगे और वहां उतरने के बाद कनेक्टिंग फ्लाइट से चेन्नई पहुंचेंगे।
भाषा संगम के महासचिव डॉ.गोविंदराजन बीते दिनों कोरोना पॉजिटिव हो गए थे लेकिन ठीक होकर लौटने पर वह व्यथित और घर जाने की जिद कर रहे थे। उनकी रवानगी की तैयारी हो गई थी लेकिन शुगर बढ़े होने से उन्हें यहीं रुकने की सलाह दी गई थी। इसी बीच शुगर बढ़ने तथा ऑक्सीजन लेवल कम होने पर भाषा संगम से जुड़ीं डॉ.शांति चौधरी ने उन्हें मेडिकल इमरजेंसी में भर्ती कराया, जहां से ठीक होकर बृहस्पतिवार को लौटे।
डॉ.गोविंदराजन के अस्वस्थ होने की सूचना पर मंत्री ‘नंदी’ ने पहल करते हुए फल, पानी सहित अपने घर पर बना भोजन भिजवाया। साथ ही हर सम्भव मदद का भरोसा देते हुए फ्लाइट से घर भिजवाने को भी कहा था। अब उनके स्वस्थ होने पर फ्लाइट से भिजवाने की व्यवस्था की गई। मंत्री नंदी ने कहा, डॉ.गोविंदराजन जैसे साहित्यकार राष्ट्र की धरोहर हैं।
विज्ञान परिषद में रहकर तमिल में किया रामचरित मानस का अनुवाद
तकरीबन बारह वर्षों पहले प्रयागराज आए डॉ.एम.गोविंदराजन ने विज्ञान परिषद परिसर में रहकर ही पहले रामचरित मानस और फिर तुलसी की सभी कृतियों का तमिल में अनुवाद किया है। पिछली बार कोरोना की दस्तक के पहले ही वह चेन्नई चले गए थे। बीते दिनों आठ मार्च को चेन्नई से प्रयागराज पहुंचे थे लेकिन बीते दिनों कोरोना की चपेट में आ गए।