जिला अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी सरकार
प्रयागराज। राम जन्मभूमि पर हुए आतंकी हमले के प्रकरण में जिला न्यायालय द्वारा सुनाए गए फैसले को प्रदेश सरकार हाईकोर्ट में चुनौती देगी। अपर सत्र न्यायाधीश ने हमले की साजिश रचने वाले चार आतंकियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि एक को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया है। सरकार का मानना है कि निचली अदालत ने फैसला सुनाने में गलती की है और कई धाराओं में अभियुक्तों को सजा नहीं दी गई।
जिला शासकीय अधिवक्ता ने अपील तैयार कर प्रस्ताव जिलाधिकारी के मार्फत शासन को भेज दिया है। डीजीसी ने सरकार से अपील दाखिल करने की अनुमति भी मांगी है। डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि का कहना है कि राम जन्मभूमि पर हुए आतंकी हमले के प्रकरण में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी दिनेश चंद ने 18 जून 2019 को नैनी जेल परिसर में सुनवाई पूरी होने के बाद निर्णय दिया था। निर्णय में अभियुक्त मो. नसीम, मो. शकील, डॉ. इरफान और आशिक इकबाल उर्फ फारूख को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और अभियुक्त मो. अजीज को दोषमुक्त कर दिया था।
निर्णय की प्रति मिलने के बाद अभियोजन ने उसका अवलोकन किया। फैसले के अध्ययन से पता चलता है कि सभी अभियुक्तों के खिलाफ अपील किए जाने लायक पर्याप्त साक्ष्य हैं। अभियुक्त अजीज के खिलाफ सभी धाराओं में 6058 पृष्ठों की अपील दाखिल करने का प्रस्ताव भेजा है। उम्रकैद की सजा से दंडित अन्य चाराें अभियुक्तों को कोर्ट ने आईपीसी की धारा 147, 148, 153(बलवा) और सात क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट और विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 16 के तहत दोषमुक्त किया गया है, जबकि धारा 16 में मृत्युदंड तक का प्रावधान है। अपील के लिए पर्याप्त आधार है। डीजीसी का कहना है कि घटना में सात लोगों की हत्या और सात लोगों को चोटें आई हैं। घटना विरल से विरलतम की श्रेणी में आती है, इसलिए अभियुक्तों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। अभियुक्तों के खिलाफ काफी सबूत उपलब्ध हैं।