कोरोना वायरस से बचाव के क्रम में घोषित लॉकडाउन के बीच बैंकों की सेवाएं भी सीमित कर दी गईं हैं। बैंकों में कैश लेनदेन समेत कुल चार सेवाएं ही दी जाएंगी। इसमें आरटीजीएस, नेफ्ट जैसी सेवाएं भी शामिल हैं, जिनके माध्यम से पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। मार्च का आखिरी सप्ताह होने की वजह से सरकारी लेनदेन सुचारु रखने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है।
लॉकडालन की घोषणा के बाद बैंकों की कार्य अवधि में भी बदलाव किया गया है। एसबीआई में पहले ही सिर्फ कैश लेनदेन, चेक क्लीयरिंग जैसी अनिवार्य सेवाएं देने की व्यवस्था लागू हो चुकी हैं। भारतीय बैंक संघ की ओर से जारी गाइडलाइन जारी होने के बाद अन्य बैंकों में भी यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके अलावा सभी सेवाएं अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दी गई हैं।
इसकी वजह से सोमवार को बैंक शाखाओं में पहुंचे लोगों को खाली हाथ वापस होना पड़ा। इसी क्रम में करीब सभी बैंकों में 50 फीसदी कर्मचारियों के लिए वर्क टू होम की व्यवस्था भी लागू की गई है। इसके तहत 50-50 प्रतिशत कर्मचारियों को एक-एक दिन के अंतराल पर बुलाने की व्यवस्था लागू की गई है। इसके अलावा एसबीआई, एचडीएफसी समेत कई बैंकों में दिन में 10 से दो बजे के बीच ही शाखाएं खोलने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था सोमवार से लागू हो गई।
एसबीआई में कैश नहीं होने से बढ़ी परेशानी
एसबीआई की मुख्य शाखा में सोमवार को कैश का संकट खड़ा हो गया। इसकी वजह से पैसा निकालने के लिए पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। बैंक खुलने के साथ सुबह 10 बजे ही शाखा में खाताधारकों के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया, लेकिन दिन में करीब एक बजे तक उन्हें कैश नहीं मिल सका था। शाखा के भीतर भीड़ न होने पाए इसलिए खाताधारकों को बाहर ही रोक दिया गया था। शाखा की गेट पर इंतजार कर रहीं शाजिया खान, प्रभात अग्रवाल, उदय सिंह आदि का कहना था कि वे काफी देर से खड़े हैं। सुरक्षा गार्ड का कहना था कि अभी कैश नहीं है। इसे लेकर उनमें नाराजगी भी रही। वहीं उप शाखा प्रबंधन अश्वनी कुमार द्विवेदी का कहना था कि चेस्ट पर नियुक्त कर्मचारी के छुट्टी पर रहने की वजह से दिक्कत हुई। चेस्ट से पैसा मिलने के बाद लोगों को भुगतान किया गया। एक बार में पांच खाताधारकों को ही भीतर जाने दिया जा रहा था।