याची का कहना है कि गाजियाबाद में ऑक्सीजन की कमी के कारण कोविड मरीजों की मौत हो गई और जिस अधिकारी पर जिले में ऑक्सीजन आपूर्ति की जिम्मेदारी है, वह ब्लैक मार्केटिंग में लिप्त हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने याचिका में लगाए आरोपों को सिरे से नकार दिया और कहा कि किसी भी अस्पताल ने ऑक्सीजन कमी की शिकायत नहीं की है।
जिलाधिकारी गाजियाबाद ने एसएसपी को याची द्वारा एक मई को भेजी गई शिकायत की जांच बैठा दी है। मुख्य विकास अधिकारी अस्मिता लाल को जांच सौंपी गई है। रिपोर्ट अभी आनी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जो भी बातें सरकार की तरफ से बताई गई हैं, जिलाधिकारी हलफनामे के जरिए कोर्ट में दाखिल करें।
सरकार का यह भी कहना है कि ऑक्सीजन आपूर्ति केंद्र सरकार कर रही है। जिले में वितरण की निगरानी के लिए एडीएम सिटी, सीएमओ व संयुक्त आयुक्त जिला उद्योग सेंटर की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गयी है। ऑक्सीजन सिलिंडर आपूर्ति एजेंसी द्वारा सीधे अस्पताल को की जाती है। किसी भी अस्पताल ने ऑक्सीजन की कमी की शिकायत नहीं की है।
लोगों की मदद के लिए कंट्रोल रूम बना है, जो 24 घंटे कार्यरत है। किसी ने भी कंट्रोल रूम को शिकायत नहीं की है। लोनी में 12 बेड का कोविड अस्पताल है। उसने भी शिकायत नहीं की है। केवल याची ने एसएसपी को शिकायत की है उसकी जांच की जा रही है। आरोप निराधार है। याचिका की सुनवाई 7 जून को होगी।