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High Court : सरकारी डॉक्टर चला रहे समानांतर मेडिकल इंडस्ट्री, एसआरएन की बदहाली पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

Wed, 06 May 2026 05:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की बदहाल स्थिति पर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि शहर के सरकारी डॉक्टर एक समानांतर मेडिकल इंडस्ट्री चला रहे हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की बदहाल स्थिति पर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि शहर के सरकारी डॉक्टर एक समानांतर मेडिकल इंडस्ट्री चला रहे हैं।

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न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस पूरे प्रकरण में उच्चस्तरीय जांच बैठाएं और निजी प्रैक्टिस में लिप्त दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें। कोर्ट ने आगे कहा कि अस्पताल की मौजूदा हालात के लिए सरकार की ओर से फंड या सुविधाओं की कमी जिम्मेदार नहीं है, बल्कि स्वयं चिकित्सा जगत से जुड़े लोग सरकार के नेक उद्देश्यों को विफल कर रहे हैं।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और लेक्चरर निजी नर्सिंग होम में प्रैक्टिस कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ये डॉक्टर सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को अपने निजी सेटअप में स्थानांतरित कर देते हैं, जहां उनका इलाज किया जाता है।
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सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने कोर्ट को सूचित किया कि 29 अप्रैल 2026 को एक एसोसिएट प्रोफेसर और उनकी पत्नी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि एसोसिएट प्रोफेसर अपनी पत्नी के हॉस्पिटल में निजी तौर पर सर्जरी करते हैं। यह विवाद मूल रूप से डॉ. अरविंद गुप्ता की याचिका पर उठा। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता चला गया।

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निजी प्रैक्टिस की जांच रिपोर्ट नहीं की गई प्रस्तुत 

कोर्ट ने इस पर भी गहरी नाराजगी जताई कि पूर्व में जिलाधिकारी प्रयागराज को डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने अब तक कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।

वहीं, कोर्ट ने कार्डियोलॉजी विभाग की मात्र दो मंजिल का निर्माण कार्य वर्ष 2006 से अटका होने पर हैरानी जताई है। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड ने इसे अगस्त 2026 तक पूरा करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज के जर्जर हो चुके छात्र-छात्राओं के हॉस्टलों को खाली कराकर उनके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वे न केवल डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की जांच करें, बल्कि पिछले दो दशकों से लंबित निर्माण कार्यों की प्रगति की स्वयं निगरानी भी करें। साथ ही, मेडिकल कॉलेज को 31,314 वर्ग मीटर भूमि हस्तांतरण के मामले में कैबिनेट की मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को इस आदेश की प्रति 48 घंटे में शासन को भेजने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी।
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