निजी प्रैक्टिस की जांच रिपोर्ट नहीं की गई प्रस्तुत
कोर्ट ने इस पर भी गहरी नाराजगी जताई कि पूर्व में जिलाधिकारी प्रयागराज को डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने अब तक कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।
वहीं, कोर्ट ने कार्डियोलॉजी विभाग की मात्र दो मंजिल का निर्माण कार्य वर्ष 2006 से अटका होने पर हैरानी जताई है। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड ने इसे अगस्त 2026 तक पूरा करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज के जर्जर हो चुके छात्र-छात्राओं के हॉस्टलों को खाली कराकर उनके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वे न केवल डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की जांच करें, बल्कि पिछले दो दशकों से लंबित निर्माण कार्यों की प्रगति की स्वयं निगरानी भी करें। साथ ही, मेडिकल कॉलेज को 31,314 वर्ग मीटर भूमि हस्तांतरण के मामले में कैबिनेट की मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को इस आदेश की प्रति 48 घंटे में शासन को भेजने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी।