प्रयागराज। मिर्जापुर में बच्चों को मिडडे-मील में नमक रोटी खिलाए जाने की खबर देने वाले पत्रकार के सरकारी उत्पीड़न पर भारतीय प्रेस परिषद ने चिंता जताई है। परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति चंद्रमौलि कुमार प्रसाद ने कहा है कि सिर्फ सरकार द्वारा पत्रकार पर मुकदमा वापस लेना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे क्या हो सकता है, इस पर विचार किया जा रहा है।
भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष चंद्रमौलि कुमार प्रसाद ने बुधवार को भी सर्किट हाउस सभागार में प्रेस पर कुठाराघात तथा पत्रकारिता के मानकों के उल्लघंन से संबंधित मामलों पर सुनवाई की। उनके साथ अन्य सदस्य तथा सचिव अनुपमा भटनागर भी मौजूद रहीं। मिर्जापुर नमक रोटी मामले में पत्रकार पर मुकदमा दर्ज किए जाने पर अध्यक्ष ने पुलिस अधिकारियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि वे ऐसे ही संविधान का उल्लंघन करते रहे तो पत्रकार कैैसे पत्रकारिता करेगा। अध्यक्ष ने एक जज की टिप्पणी की याद दिलाई, जिसमें जज ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में पुलिस बल अपराधियों का एक व्यवस्थित गिरोह है।
एक दैनिक अखबार के संवाददाता ने मिर्जापुर के अहरौरा गांव के प्राइमरी स्कूल में बच्चों को मिडडे-मील में रोटी-नमक परोसे जाने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर प्रशासन ने पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। अध्यक्ष ने बताया कि मिर्जापुर में मिड-डे मील, आंध्र में पत्रकार की हत्या जैसे मामलों की परिषद ने स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की। उन्होंने बताया कि 45 में से 40 मामले उत्तर प्रदेश के थे, इसलिए प्रयागराज में सुनवाई की गई। न्यायमूर्ति ने बताया कि सुनवाई के बाद की गई संस्तुति को फुल काउंसिल को भेजा जाएगा। फुल काउंसिल के अनुमोदन के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूसरे दिन 23 वादों की सुनवाई की गई। इस तरह से दो दिन में कुल 45 मामले सुने गए। इस दौरान कुल 33 प्रकरण निस्तारित किए गए। इनमें से 18 मामले इसी वर्ष के थे।
परिषद में सुनवाई बगैर पत्रकार के खिलाफ न हो मुकदमा
भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति चंद्रमौलि कुमार प्रसाद ने पत्रकार वार्ता में बताया कि पत्रकार के खिलाफ सीधे मुकदमा न लिखा जाए। इससे पहले परिषद में मामले की सुनवाई हो। इसके बाद ही मुकदमा लिखा जाए। इस तरह के प्रावधान के लिए संस्तुति की गई है। इसके अलावा मीडिया काउंसिल की भी संस्तुति की गई है। इन संस्तुतियों पर अब सरकार को निर्णय लेना है। उन्होंने बताया कि एक राज्य में पत्रकारों पर केस लिखाने की प्रक्रिया आसान की गई है। सरकार की तरफ से इसका आदेश दिया गया है।
पूछे जाने पर पता चला कि 2007 का ही यह आदेश है। नए आदेश में इसका विस्तार किया गया है। काउंसिल ने इस आदेश को वापस लिए जाने की संस्तुति की है। न्यायमूर्ति चंद्रमौलि ने अखबारों में छपने वाले भ्रामक और आपत्तिजनक विज्ञापनों पर भी चिंता जताई। एक मीटिंग में 20 से 40 हजार रुपये कमाएं जैसे विज्ञापनों पर आपत्ति जताते हुए गैरकानूनी बताया। उन्हाेंने पत्रकारिता के मानक, गिरती साख, पत्रकारों की सुरक्षा आदि बिंदुओं पर भी चर्चा की और सवालों के जवाब दिए।
मीडिया आयोग के गठन की मांग
यूपी जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष को तीन सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। इसके माध्यम से एसोसिएशन ने पत्रकार सुरक्षा कानून, मीडिया काउंसिल और मीडिया आयोग के गठन की मांग की। प्रांतीय अध्यक्ष रतन दीक्षित ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई।