नवरात्रि पर कल्याणी देवी का भव्य श्रृंगार किया गया।
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शक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर में नवरात्र पर भक्तों पर विशेष कृपा बरसती है। पुरातत्व विभाग प्रमाणित करता है कि मां कल्याणी की मूर्ति करीब 1500 वर्ष प्राचीन है। भगवती सती की अंगुलियां यहां गिरी थीं, जिसका प्रमाण पद्म पुराण, मत्स्य पुराण, ब्रह्मावर्त पुराण, प्रयाग माहत्म्य के 76वें अध्याय में मिलता है। मान्यता है कि यहां पर आदिकाल से लोगों का कल्याण होता रहा इसीलिए इन्हें कल्याणी भी कहते हैं। आचार्य पंडित श्यामजी पाठक ने बताया कि मां भगवती अपने आंचल में सिद्ध और शक्ति को लपेटे दिव्य आभा आकर्षण का केंद्र हैं। मां के प्रतिमा मंडल के मध्य भाग में एक आभा चक्र है।
मां के बाएं भाग में 10 महाविद्याओं में से एक मां छिन्नमस्तिका देवी की अनुपम प्रतिमा विराजमान है। मां के दाएं भाग में शिव जी की मनोरम प्रतिमा के साथ पार्वती जी विराजमान हैं। मां की प्रतिमा के ठीक ऊपर ब्रह्मा जी विराजमान हैं। ऊपर ही मां के दाएं भाग में गजानन गणेश जी और बाएं में हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है। मां कल्याणी की प्रतिमा 32 अंगुल की है जिसका जिक्र पुराणों में भी है। इनकी सेविकाओं के रूप में दो जोगनिया भी हैं। देवी देवताओं का ऐसा संगम समानता अन्यत्र दिखाई नहीं देता जब इस प्रतिमा मंडल का पूरा शृंगार हो जाता है तो इसकी शोभा अवनी हो जाती है।